चरण सिंह
जब देश के हालात की बात करते हैं तो काफी लोग यह कहने लगते हैं कि अब तो पूरी दुनिया की हालत ही ख़राब है। तो क्या अपने देश की चिंता करना हम लोग भी छोड़ दें। दरअसल दुनिया के देशों से अलग हमारे देश के लोकतंत्र की खूबसूरती ही यह रही है कि तमाम जातियों, धर्म, भाषा और संस्कृति के बावजूद हम एक रहे हैं। अनेकता में एकता ही हमारी पहचाना रही है। तो इस माहौल के लिए एकमात्र पार्टी बीजेपी ही जिम्मेदार है ? इसमें दो राय नहीं है कि देश का भाईचारा बिगड़ा है।
जाति और धर्म के नाम पर नफरत का माहौल बनता जा रहा है। देखने की बात यह है कि भले ही इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा देते हों पर यह भी जमीनी हकीकत है कि विपक्ष भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं है। बीजेपी यदि हिन्दू मुस्लिम का माहौल बनाती है तो क्या विपक्ष की पार्टियां वोट बैंक तक ही सीमित नहीं रह गई हैं ?
क्या समाजवादी पीडीए का ही राग नहीं अलाप रही है ? कितना भला किया पीडीए का ? क्या कांग्रेस को मुस्लिम और दलित ही नहीं दिखाई दे रहा है ? क्या बिहार में आरजेडी माई समीकरण की राजनीति नहीं करती है ? क्या इन पार्टियों को वोट बैंक के अलावा कुछ दिखाई देता है ? चिंता की बात यह है कि देश और समाज की बात करने को कोई तैयार नहीं है। यही वजह है कि देशभक्ति दिखावा बनती जा रही है। पैसा आदमी की जिंदगी पर इतना हावी हो गया है कि आदमी को पैसा दो और कुछ भी करा लो। तो इस माहौल में आप विश्व गुरु का सपना पूरा कर सकते हैं। लालची प्रवृत्ति के चलते अब तो फिर से देश के गुलाम होने के अंदेशे से इंकार नहीं क्या जा सकता है।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या देश को इस हालत में ही छोड़ दिया जाए ? या फिर देश में देशभक्ति कैसे जगाई जा सकती है ?देश में सब कुछ दिखावा हो रहा है। अंदरखाने देश को खोखला कर दिया है। देश में आज़ादी का माहौल बनाने की जरुरत है। जैसे आज़ादी की लड़ाई के समय युवाओं में देशभक्ति का जज्बा था उनकी प्राथिमिकता देश की आज़ादी थी। ऐसे ही आज के युवाओं की प्राथमिकता देश होना चाहिए। देशभक्ति में स्वार्थ और लालच की कोई जगह नहीं है। लोकसभा और विधानसभाओं में जमीनी लोग भेजने होंगे। अपने बीच के लोग विधायक और सांसद बनाइये। वही आदमी बुलंदी छूता जो स्वाभिमानी होगा। हर माहौल को अपने में ढाल लेगा।

