पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने डोभाल के बयानों को “विकृत और भ्रामक” करार देते हुए खारिज किया और कहा कि ये “जिम्मेदार राजनय के मानदंडों का उल्लंघन” करते हैं। प्रवक्ता शफकत अली खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “संघर्ष का महिमामंडन किसी के हित में नहीं है” और “स्थायी शांति का रास्ता बातचीत, आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन में निहित है।
पाकिस्तान ने डोभाल के दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के दावे “अंतरराष्ट्रीय नियमों” का उल्लंघन करते हैं और शांति के लिए बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने नुकसान या सैन्य प्रतिक्रिया के बारे में कोई ठोस सबूत या विस्तृत खंडन नहीं पेश किया।
यह विवाद 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारत ने इसके जवाब में 7 मई को 23 मिनट के ऑपरेशन में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल और स्वदेशी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
विश्लेषण: डोभाल के बयान भारत की सैन्य ताकत और स्वदेशी तकनीक पर जोर देते हैं, जबकि पाकिस्तान का जवाब इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताकर नैतिक आधार लेने की कोशिश करता है। हालांकि, पाकिस्तान का यह दावा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं मान रहा, अस्पष्ट है, क्योंकि न तो विदेश मंत्रालय ने और न ही उनकी प्रतिक्रिया में किसी विशिष्ट कानून (जैसे UN चार्टर के अनुच्छेद 51, जो आत्मरक्षा की अनुमति देता है) का उल्लेख किया गया। भारत का तर्क है कि ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कार्रवाई थी, जो आत्मरक्षा के अधिकार के तहत उचित है।
पाकिस्तान की बातचीत की अपील क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक अविश्वास और ठोस सबूतों के अभाव में यह विवाद जारी रह सकता है।

