पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अजहर मसूद पर इनाम की रकम बढ़ाने को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने पड़ोसी मुल्क को लताड़ लगाई है। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान की ओर से इस तरह के हथकंडे अपनाना कोई नई बात नहीं है, वह लोगों को गुमराह करने के लिए इस तरह के प्रयास पहले भी करता रहा है।जायसवाल ने कहा, ‘हमने पहले भी पाकिस्तान के ऐसे हथकंडे देखे हैं। हम सभी जानते हैं कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश की ओर से इस तरह की झूठी घोषणाएं करना कितना खोखला है। पाकिस्तान को ऐसी घोषणाएं करने के बजाय ठोस कार्रवाई करनी चाहिए जिनका कोई परिणाम नहीं निकलता।
पाकिस्तान की फेडरल जांच एजेंसी ने अपनी नई ‘रेड बुक’ में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित किया है और उसके सिर पर इनाम भी बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। पाकिस्तान का यह फैसला आतंकी के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि एक चाल के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, अक्तूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक होनी है, ऐसे में वह दोबारा वैश्विक निगरानी संस्था की ‘ग्रे लिस्ट’ में जाने से बचने के लिए यह हथकंडा अपना रहा है।
इसकी पोल इस बात से खुलती है कि पाकिस्तान पहले भी मसूद अजहर को लेकर बरगलाता दिखाई दिया है। साल 2021 से पड़ोसी मु्ल्क की ओर से यह कहा जाता रहा है कि मसूद अजहर पाकिस्तान में नहीं है और वह अफगानिस्तान भाग चुका है, FIA ने उस पर 50 लाख का इनाम भी रखा. लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान में ही छिपा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वह सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में छिपा है. ऐसे में आतंकी अजहर मसूद को केवल कागजों पर भगोड़ा घोषित करने और उसके सिर पर इनाम बढ़ाने को लेकर पाकिस्तान की सोच को उजागर करता है. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि आतंकियों के नाम सूची में डालना तभी प्रभावी कार्रवाई मानी जाएगी, जब उनके खिलाफ सही जांच, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई भी हो. केवल इनाम घोषित करने और नाम मोस्ट वांटेड सूची में जोड़ने से आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की जिम्मेदारी साबित नहीं होती।

