चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति लंबे समय से भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय रही है। इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में पोर्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए चीन अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, जो भारत को समुद्री और स्थलीय रूप से घेरने जैसा लगता है।
2025 में हाल की घटनाएं—like बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद पाकिस्तान और चीन के साथ करीबी बढ़ना, तथा कुनमिंग में चीन-पाक-बांग्लादेश त्रिपक्षीय मीटिंग—इस धारणा को और मजबूत कर रही हैं। ये प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से आर्थिक हैं, लेकिन इनमें ड्यूल-यूज (सिविलियन और मिलिट्री) पोटेंशियल है, जो भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का कारण बनता है।
2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के तहत चीन और पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ा है, जैसे त्रिपक्षीय मीटिंग्स और संभावित नए क्षेत्रीय ग्रुपिंग। म्यांमार में अस्थिरता के बावजूद चीन का प्रभाव बना हुआ है।
भारत इसका मुकाबला कर रहा है—नेकलेस ऑफ डायमंड्स रणनीति से, क्वाड, BIMSTEC जैसे ग्रुप्स से, और पड़ोसियों में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाकर। भारत की नौसेना और डिप्लोमेसी भी मजबूत हो रही है।
कुल मिलाकर, चीन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन भारत भी सक्रिय रूप से काउंटर कर रहा है। स्थिति गतिशील है, और क्षेत्रीय स्थिरता सभी के हित में है।
PAK, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार… भारत को चौतरफा घेरने की प्लानिंग में जुटा ड्रैगन

