एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ लिखी तस्वीर स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह घटना ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद के बीच हुई, जो मूल रूप से 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कानपुर में मुहर्रम जुलूस के दौरान बैनर लगाने से शुरू हुआ था। उस जुलूस में ‘आई लव मोहम्मद’ के बैनर पर स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद पुलिस ने बैनर हटाए और 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
कार्यक्रम के बाद युवाओं ने ओवैसी को ‘आई लव मोहम्मद’ फोटो फ्रेम भेंट किया, जिसमें गुंबद-ए-खिजरा (मदीना में मस्जिद-ए-नबवी के पास पैगंबर मोहम्मद की कब्र से जुड़ी पवित्र जगह) की तस्वीर के साथ ओवैसी की फोटो भी लगी हुई थी। ओवैसी ने फ्रेम हाथ में लिया, लेकिन जैसे ही उन्हें अपनी फोटो दिखी, वे नाराज हो गए और अपनी फोटो पर हाथ रखते हुए बोले, “कहां गुंबद-ए-खिजरा और कहां मैं… मेरी फोटो क्यों डाली आप… ऐसा नहीं करना भाई… मेरे को क्यों गुनेहगार बना रहे।” उन्होंने फ्रेम लौटा दिया।
ओवैसी ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें फुजैल फारूक नाम के यूजर का वीडियो शामिल था। फारूक ने स्पष्ट किया कि ओवैसी इस नारे से दूरी नहीं बना रहे, बल्कि एक सच्चा मुसलमान अपनी फोटो को गुंबद-ए-खिजरा या पैगंबर के नाम के बराबर नहीं रखना चाहेगा। उन्होंने लोगों से गलत प्रोपेगेंडा न फैलाने की अपील की। ओवैसी ने विवाद पर कहा कि अगर कोई मुसलमान है, तो वह मोहम्मद की वजह से है, और यह 17 करोड़ भारतीय मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बरेली में पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की, जहां ‘आई लव मोहम्मद’ नारे पर कार्रवाई हुई।
यह घटना सोशल मीडिया पर बहस का विषय बनी हुई है, जहां कुछ लोग ओवैसी पर ‘दोहरी नीति’ का आरोप लगा रहे हैं, जबकि समर्थक इसे धार्मिक संवेदनशीलता का मामला बता रहे हैं।






