हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (ओपी राजभर) के बेटे अरविंद राजभर ने बीजेपी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए एक बड़ा दावा किया। यह दावा इतना तीखा था कि बीजेपी के अंदर टेंशन बढ़ गई, क्योंकि यह गठबंधन की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। आइए, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं कि आखिर मामला क्या है।
पृष्ठभूमि: ओपी राजभर और बीजेपी का रिश्ता
ओपी राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के संस्थापक हैं और पूर्वांचल में राजभर समाज के बड़े नेता माने जाते हैं।
2023 में उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर बीजेपी-एनडीए के साथ गठबंधन किया था। इसके बदले उन्हें यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद मिला।
उनके बेटे अरविंद राजभर 2024 के लोकसभा चुनाव में घोसी सीट से बीजेपी के समर्थन पर लड़े, लेकिन हार गए। इससे राजभर परिवार में असंतोष की खबरें आने लगीं।
क्या दावा किया अरविंद राजभर ने?
18 सितंबर 2025 को बलिया में एक घटना हुई, जहां एक सुभासपा कार्यकर्ता को पुलिस ने थप्पड़ मारे। अरविंद राजभर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा: “पुलिस ने गलतफहमी में हमारे समर्थक को थप्पड़ जड़ दिया।” लेकिन इशारों में उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा कि “हमारे कार्यकर्ताओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हो रहा है, जबकि हम गठबंधन में हैं?”
यह दावा अप्रत्यक्ष था, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अरविंद ने आगे कहा कि “बीजेपी अगर राजभर समाज की इज्जत नहीं रखेगी, तो गठबंधन का कोई मतलब नहीं।” यह बयान बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि पूर्वांचल में सुभासपा का वोट बैंक महत्वपूर्ण है।
बीजेपी की टेंशन क्यों बढ़ी?
आंतरिक असंतोष: बीजेपी के पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर ने 6 सितंबर 2025 को बलिया में कहा, “ओम प्रकाश राजभर और उनके बेटे बदतमीज हैं। अपनी हरकतों से भाजपा की मर्यादा को धूमिल कर रहे हैं। पार्टी को राजभर को बर्खास्त कर देना चाहिए, वरना माहौल खराब होगा।” यह बयान बीजेपी के अंदर ही फूट का संकेत देता है।
प्रदर्शन और विवाद: 3 सितंबर 2025 को लखनऊ में एबीवीपी (बीजेपी की छात्र विंग) कार्यकर्ताओं ने ओपी राजभर के आवास पर प्रदर्शन किया। कारण? राजभर के एक बयान पर नाराजगी, जिसमें उन्होंने एबीवीपी को “गुंडा” कहा था। प्रदर्शनकारियों ने घर के अंदर जूते-चप्पल फेंके। ओपी राजभर के दूसरे बेटे अरुण राजभर ने इसे “गुंडागर्दी” बताया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
सपा की ओर इशारा: 19 सितंबर 2025 को ओपी राजभर ने खुद बीजेपी से नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “पूर्वांचल में बीजेपी का खाता नहीं खुलेगा” और सपा के साथ आने के संकेत दिए। अरविंद का दावा इसी क्रम में आया, जो बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। सपा समर्थक इसे “गठबंधन टूटने का संकेत” बता रहे हैं।
राजनीतिक नुकसान: 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले पूर्वांचल में ओबीसी वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है। राजभर समाज (लगभग 8-10% वोट) अगर सपा की ओर मुड़े, तो बीजेपी को भारी नुकसान होगा।
सोशल मीडिया पर हंगामा
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #OPRajbhar और #BJP_Tension जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। सपा समर्थक पोस्ट कर रहे हैं: “राजभर अब मंदिर के घंटे बन चुके हैं – कभी एबीवीपी बजाती है, कभी पुलिस।”
एक पोस्ट में लिखा: “अरविंद राजभर ने साफ कह दिया – बीजेपी राजभर समाज की इज्जत नहीं रखेगी तो गठबंधन खत्म। योगी सरकार में धक्का देकर चल रही है।”
आगे क्या?
ओपी राजभर ने कहा है कि “इस्तीफा जेब में लेकर घूमते हैं,” जो गठबंधन छोड़ने का इशारा है।
बीजेपी ने अभी चुप्पी साध रखी है, लेकिन योगी सरकार में फेरबदल की अटकलें तेज हैं।
अगर अरविंद का दावा सच्चा साबित हुआ, तो यह बीजेपी के लिए पूर्वांचल में बड़ा संकट बन सकता है। सपा इसे अपनी जीत बता रही है।
यह मामला अभी विकसित हो रहा है। अगर नया अपडेट आया, तो और डिटेल्स शेयर करूंगा। क्या आप इस पर कोई स्पेसिफिक एंगल जानना चाहते हैं?1.9sExpertHow can Grok help?

