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रामजी के कतरे पर, भतीजे आकाश की फिर उड़ान… बसपा की नई टीम के पीछे मायावती का समझें गेम

मायावती ने हाल ही में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बड़े संगठनात्मक बदलाव किए हैं, जिसके केंद्र में उनके भतीजे आकाश आनंद का कद बढ़ाना और रामजी गौतम जैसे नेताओं की भूमिका में बदलाव शामिल है। इस कदम को बसपा की सियासी रणनीति के तहत एक सोची-समझी चाल माना जा रहा है, जिसके कई आयाम हैं। आइए, इसे विस्तार से समझते हैं:

 

आकाश आनंद का बढ़ता कद

 

प्रमोशन और वापसी: मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाकर पार्टी में नंबर-2 की स्थिति दी है। इससे पहले, मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश को उनके आक्रामक बयानों (जैसे, भाजपा को “आतंकवादी पार्टी” कहना) के कारण राष्ट्रीय समन्वयक और उत्तराधिकारी के पद से हटा दिया गया था। मायावती ने तब उन्हें “अपरिपक्व” बताया था। लेकिन अब, उनकी वापसी और प्रमोशन से यह साफ है कि मायावती आकाश को लंबे समय तक पार्टी का चेहरा बनाना चाहती हैं।
युवा चेहरा: आकाश आनंद को बसपा का युवा और आधुनिक चेहरा माना जाता है। उनकी सोशल मीडिया सक्रियता और युवा सम्मेलनों में भागीदारी से पार्टी को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। यह खासकर तब महत्वपूर्ण है, जब बसपा का जनाधार पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुआ है, और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर 19% से घटकर लगभग 10% रह गया।
रणनीति: आकाश को आगे करके मायावती नई पीढ़ी के मतदाताओं, खासकर दलित युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में उपचुनावों में उनकी स्टार प्रचारक की भूमिका इस दिशा में एक कदम है।

 

रामजी गौतम की भूमिका में बदलाव

 

कम हुआ प्रभाव: रामजी गौतम, जो पहले राष्ट्रीय समन्वयक और मायावती के भरोसेमंद नेताओं में से एक थे, को अब छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटरों में से एक बनाया गया है। उनके पास दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे राज्यों की जिम्मेदारी है, लेकिन उनकी स्थिति पहले जितनी प्रभावशाली नहीं रही। यह संकेत देता है कि मायावती ने उनके “सियासी पर कतर दिए” हैं, ताकि आकाश का दबदबा बढ़ाया जा सके।
संतुलन की रणनीति: रामजी गौतम को संगठन में बनाए रखकर मायावती ने जमीनी कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं को यह संदेश दिया है कि अनुभव को महत्व दिया जाएगा, लेकिन आकाश के नेतृत्व को प्राथमिकता मिलेगी। यह पार्टी में परिवारवाद के आरोपों को कम करने की कोशिश भी हो सकती है।

 

संगठन में बड़े बदलाव

 

छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर: मायावती ने तीन से बढ़ाकर छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए हैं, जिनमें लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव, और धर्मवीर सिंह अशोक जैसे नए चेहरों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही, राजाराम, रणधीर बेनीवाल, और रामजी गौतम पहले से इस भूमिका में थे। प्रत्येक कोऑर्डिनेटर के साथ सह-प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं, जैसे राजाराम के साथ मोहित आनंद और अतर सिंह के साथ सुरेश आर्या।
प्रदेश स्तर पर बदलाव: कई राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं, जैसे पंजाब में अवतार सिंह करीमपुरी, राजस्थान में प्रेम बारुपाल, और झारखंड में शिव पूजन मेहता। हालांकि, उत्तर प्रदेश में विश्वनाथ पाल को फिर से जिम्मेदारी दी गई है, जो मायावती के भरोसे का प्रतीक है।

 

मायावती का गेम: रणनीति और उद्देश्य

 

मायावती की यह रणनीति कई स्तरों पर काम कर रही है:

पार्टी को पुनर्जनन: बसपा की सियासी जमीन पिछले डेढ़ दशक में कमजोर हुई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता नहीं खुला, और उत्तर प्रदेश में केवल एक विधायक बचा है। आकाश को आगे लाकर और संगठन में बदलाव करके मायावती पार्टी को नई ऊर्जा देना चाहती हैं।
परिवार और अनुभव का संतुलन: आकाश के प्रमोशन से परिवारवाद के आरोप लग सकते हैं, लेकिन रामजी गौतम और विश्वनाथ पाल जैसे अनुभवी नेताओं को बनाए रखकर मायावती ने संतुलन बनाने की कोशिश की है।
आंतरिक एकता: आकाश को पहले हटाने और फिर वापस लाने के फैसले से मायावती ने पार्टी में अपनी सर्वोच्चता का संदेश दिया है। साथ ही, आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकालकर उन्होंने यह दिखाया कि वे पार्टी हित को परिवार से ऊपर रखती हैं।
2027 के यूपी चुनाव की तैयारी: मायावती का फोकस 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर है। आकाश को जिम्मेदारी देकर और संगठन को मजबूत करके वे दलित वोट बैंक को फिर से एकजुट करना चाहती हैं।

 

 

चुनौतियां और सवाल

 

आकाश की परिपक्वता: आकाश की आक्रामक शैली और पूर्व के विवादित बयानों ने मायावती को उन्हें हटाने के लिए मजबूर किया था। क्या इस बार आकाश सावधानी बरत पाएंगे?
पार्टी का कमजोर जनाधार: बसपा का वोट शेयर घट रहा है, और दलित वोटरों का एक हिस्सा अन्य पार्टियों (जैसे आजाद समाज पार्टी या सपा) की ओर जा रहा है। मायावती को इसे रोकने के लिए ठोस रणनीति चाहिए।
परिवारवाद का आरोप: आकाश और आनंद कुमार को अहम जिम्मेदारियां देने से परिवारवाद के आरोप फिर से मजबूत हो सकते हैं, जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं

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