ए मेरे प्यारे बामन
क्यों इतना गुमान करते हो
हर बात पर राम-राम कहकर
क्यों इतना हैरान करते हो ..
मंत्रों से जग भ्रमित करते हो
ज्ञान होने का बखान करते हो
क्या तुम दिल में
थोडा भी ईमान रखते हो ..
ग्रंथों की आड़ में छिपकर
झूठ का बखान करते हो
मन गणन्त उपदेश गा कर
क्यों खुद को शर्मसार करते हो ..
ए मेरे प्यारे बामन
क्यों इतना गुमान करते हो
हर बात पर राम-राम कहकर
क्यों इतना हैरान करते हो ..
कर मांस मदिरा का सेवन
माँ का गंगा स्नान करते हो
क्या तुम स्व मन को
थोड़ा सा भी साफ करते हो ..
छुआछूत का ढोंग रचाकर
पंडित होने का गुमान करते हो
क्या तुम जरा भी
मानवता का ज्ञान रखते हो ..
ए मेरे प्यारे बामन
क्यों इतना गुमान करते हो
हर बात पर राम-राम कहकर
क्यों इतना हैरान करते हो ..
महलों में रहकर
दलितों पर हाय हाय करते हो
क्या तुम खुद
थोड़ा भी श्रमदान करते हो ..
ए मेरे प्यारे बामन
क्यों इतना गुमान करते हो
हर बात पर राम-राम कहकर
क्यों इतना हैरान करते हो ..
के एम भाई

