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NTA मॉडल फेल, शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र दिखावा है – सीटू ने की NTA भंग करने की मांग : गंगेश्वर दत्त शर्मा

NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के कथित त्यागपत्र के नाटक पर सीटू की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा जारी किये गए दो पन्नों के कथित भावुक पत्र और त्यागपत्र की खबरें आज मीडिया में हैं। सीटू, गौतमबुद्धनगर इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों की विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास मानती है।
जैसा कि मंत्री जी के पत्र में स्वयं स्वीकार किया गया है कि 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में अनियमितता पाई गई, परीक्षा रद्द करनी पड़ी और CBI जांच सौंपनी पड़ी। 20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को महीनों तक मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा और 21 जून को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी।
यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में NTA द्वारा आयोजित हर बड़ी परीक्षा – NEET, NET, CUET में पेपर लीक, धांधली और अव्यवस्था सामने आई है। यह इस बात का सबूत है कि शिक्षा को निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ‘whole of government approach’ जैसे जुमलों के हवाले करने से शिक्षा माफिया ही मजबूत हुआ है।
मंत्री जी अपने पत्र में लिखते हैं – “हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे”। हम पूछना चाहते हैं कि परीक्षा माफिया को किसने पैदा किया? NTA जैसी निजी एजेंसी मॉडल की संस्था को किसने बनाया? गरीब पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों का भविष्य किसकी नीतियों के कारण दांव पर लगा है?
और अब जब जंतर-मंतर पर देश के युवा, छात्र, अभिभावक और शिक्षक न्याय मांग रहे हैं, तो “राष्ट्र विरोधी ताकतों को लाभ न हो” और “बच्चे पढ़ाई में ध्यान लगाएं” कह कर आंदोलन को बदनाम करने और इस्तीफे का भावनात्मक नाटक रचा जा रहा है। देश की युवाशक्ति भ्रम के कुचक्र में नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों के कुचक्र में फंसी है।
सीटू, गौतमबुद्धनगर की मांग है :-
1. शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र नाटक नहीं, बल्कि पूरे मामले की जवाबदेही तय हो और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। 2. NTA को भंग कर UGC / सरकारी तंत्र के माध्यम से पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बहाल की जाए। 3. NEET जैसी परीक्षाओं को अगले साल से CBT (Computer-based-test) करने का निर्णय लेने से पहले छात्रों, शिक्षकों और अभिभावक संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए। 4. पीड़ित 20 लाख छात्रों को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई सरकार करे। 5. शिक्षा के बढ़ते केंद्रीकरण और व्यावसायीकरण पर रोक लगाई जाए। सीटू जिले के सभी मजदूरों, कर्मचारियों, छात्रों, नौजवानों और अभिभावकों से अपील करती है कि शिक्षा को बचाने की इस लड़ाई में एकजुट हों।

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