चरण सिंह
धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार किए गए सहारा के दूसरे नंबर के डायरेक्टर ओपी श्रीवास्तव के बाद अब दूसरा नंबर सहारा मुखिया सुब्रत राय के पीए रहे विजय डोगरा का है। जानकारी मिल रही है कि विजय डोगरा को ईडी ने कोलकाता तलब कर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। विजय डोगरा हवाला केस में लंदन में गिरफ्तार भी हो चुका था। विजय डोगरा पर आरोप है कि यह व्यक्ति निवेशकों का पैसा हवाला के जरिये विदेश में भेजता था। इसके पास भी देश और विदेश में कई होटल हैं।
जानकारी मिल रही है कि 1978 से अब तक के सहारा के जितने भी डायरेक्टर रहे हैं उनकी और उनके परिवार के सदस्यों की सम्पत्ति की जांच हो सकती है। सहारा में उच्चतम प्रबंधन में शामिल अलख सिंह, अनिल विक्रम सिंह, श्यामवीर सिंह, डी के श्रीवास्तव, संजय अरोरा, जिया कादरी, अवधेश श्रीवास्तव, रवि शंकर दुबे भी ईडी के निशाने पर हैं। ओपी श्रीवास्तव के साथ ही उनकी पत्नी, बेटे और बहू पर भी पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार बाबा राम देव के ओपी श्रीवास्तव से पल्ला झाड़ने पर ओपी श्रीवास्तव की गिरफ्तारी हुई है। दरअसल ओपी श्रीवास्तव को पूरा विश्वास था कि बाबा राम के धंधे में उन्होंने सहारा का अरबो रुपए लगा रखा है तो उनको बचाना रामदेव की मज़बूरी है पर रामदेव ऐनवक्त पर उनको गच्चा दे गए।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार ओपी श्रीवास्तव सहारा की 88 सम्पत्ति की अडानी से डील में गृहमंत्री अमित शाह को भी बरगलाने लगे थे। अमित शाह ओपी श्रीवास्तव से नाराज हो गए। जब बाबा राम देव से अमित शाह ने पूछा तो राम देव ने ओपी श्रीवास्तव से कोई लेना देना न कहकर उनकी पत्नी का पैसा उनके धंधे में लगा होने की बात कर दी। उसके बाद ही ओपी श्रीवास्तव की गिरफ्तारी की गई है। अडानी ग्रुप से डील में सहारा डायरेक्टरों के बरगलाने पर अमित शाह बहुत नाराज बताए जा रहे हैं।
दरअसल सहारा में सुब्रत राय, ओपी श्रीवास्तव और जेबी राय समेत उच्चतम प्रबंधन का रवैया कर्मचारियों और निवेशकों को भयभीत करने का रहा है। कई अधिकारियों से तो लखनऊ सहारा शहर बुलाकर बदतमीजी की गई। कई की तो पिटाई भी कराई गई। राष्ट्रीय सहारा के संयुक्त संपादक रहे राजीव सक्सेना की तो मुलायम सरकार में गिरफ्तारी ही करा दी थी। उस समय अमर सिंह सुब्रत राय के खास हुआ करते थे। राजीव सक्सेना के नाम राष्ट्रीय सहारा से सटा एक प्लाट था। राजीव सक्सेना वह सम्पत्ति सहारा के नाम नहीं कर रहे थे। अमर सिंह से कहकर राजीव सक्सेना की गिरफ्तारी कराई गई थी। नोएडा के सेक्टर 20 थाने में राजीव सक्सेना को रखा गया था।
सहारा में इस तरह का माहौल था कि प्रबंधन के खिलाफ आप कुछ नहीं बोल सकते थे। अनुशासन के नाम पर कर्मचारियों और निवेशकों को बहुत डरा कर रखा जाता था। कर्मचारियों और निवेशकों का परिवार के नाम पर शोषण होता था। इमोशनल ब्लैकमेल किया जाता था। उच्चतम प्रबंधन तक दलाली खाते थे। जानकारी तो यह भी मिलती है कि जब कोई भी डील होती थी उसमें 60 फीसद सुब्रत राय और 20-20 फीसद जेबी राय और ओपी श्रीवास्तव का होता था।
हां हम लोगों ने जब बकाया भुगतान को लेकर नोएडा सहारा मीडिया ऑफिस में आंदोलन किया था तो सहारा प्रबंधन से लेकर मालिकान तक की हेकड़ी निकल गई थी। तिहाड़ जेल बंद सुब्रत राय की हेकड़ी भी निकाल आये थे। नोएडा परिसर में ही टेंट गाड़ दिया था।

