88 लाख रुपए में मिलेगा वीजा, पहले मिलता था 65 हजार रुपए में
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर को एक प्रोज़ेक्यूशन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें H-1B वीजा के नए आवेदनों के लिए सालाना 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) की फीस लगाई गई है। यह फीस पहले की तुलना में करीब 465 गुना ज्यादा है, क्योंकि पहले H-1B वीजा रजिस्ट्रेशन फीस सिर्फ 215 डॉलर (लगभग 18,000 रुपये) और फॉर्म फीस करीब 780 डॉलर (लगभग 65,000 रुपये) थी, जो कुल मिलाकर 1,000 डॉलर से भी कम बैठती थी। भारतीय मीडिया में इसे “10 गुना से भी ज्यादा” कहा जा रहा है, जो संभवतः अतिशयोक्ति या अनुमानित आंकड़े पर आधारित है, लेकिन वास्तविक वृद्धि इससे कहीं ज्यादा है।
मुख्य बदलाव क्या हैं?
फीस की वृद्धि: अब कंपनियों को प्रत्येक H-1B वर्कर के लिए सालाना 100,000 डॉलर देना होगा। यह टेक, फाइनेंस और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स को प्रभावित करेगा, जहां H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
उद्देश्य: ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह अमेरिकी वर्कर्स को प्राथमिकता देने और विदेशी वर्कर्स के जरिए वेतन दबाने को रोकने के लिए है। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “अमेरिकंस को ट्रेन करें, विदेशियों को न लाएं जो नौकरियां छीनें।”
अन्य कदम: ट्रंप ने एक “गोल्ड कार्ड” वीजा प्रोग्राम भी लॉन्च किया, जिसमें असाधारण योग्यता वाले विदेशी 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.8 करोड़ रुपये) देकर फास्ट-ट्रैक वीजा पा सकेंगे। एक “प्लेटिनम कार्ड” पर भी काम चल रहा है, जो 5 मिलियन डॉलर का होगा।
उद्देश्य: ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह अमेरिकी वर्कर्स को प्राथमिकता देने और विदेशी वर्कर्स के जरिए वेतन दबाने को रोकने के लिए है। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “अमेरिकंस को ट्रेन करें, विदेशियों को न लाएं जो नौकरियां छीनें।”
अन्य कदम: ट्रंप ने एक “गोल्ड कार्ड” वीजा प्रोग्राम भी लॉन्च किया, जिसमें असाधारण योग्यता वाले विदेशी 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.8 करोड़ रुपये) देकर फास्ट-ट्रैक वीजा पा सकेंगे। एक “प्लेटिनम कार्ड” पर भी काम चल रहा है, जो 5 मिलियन डॉलर का होगा।
भारतीयों पर असर
IT सेक्टर पर झटका: भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी है (71% वीजा भारतीयों को मिलते हैं)। TCS, Infosys जैसी कंपनियां और Amazon, Google जैसी US फर्म्स पर असर पड़ेगा। अमेज़न के पास ही 10,000 से ज्यादा H-1B वर्कर्स हैं। छोटी कंपनियां या स्टार्टअप्स अब भारतीय टैलेंट हायर करने से हिचकिचाएंगी।
लॉटरी सिस्टम प्रभावित: सालाना 85,000 H-1B वीजा लॉटरी से मिलते हैं। फीस बढ़ने से आवेदन कम हो सकते हैं, लेकिन योग्य उम्मीदवारों को फायदा मिल सकता है।
कानूनी चुनौतियां: विशेषज्ञों का कहना है कि यह फीस अदालतों में चुनौती का सामना कर सकती है, क्योंकि यह कानूनी आव्रजन को सीमित करती है। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का यह हिस्सा है, जो पहले टर्म में भी H-1B पर सख्ती दिखा चुका था। अगर आपको और डिटेल्स चाहिए, जैसे भारतीय IT कंपनियों की प्रतिक्रिया, तो बताएं!
लॉटरी सिस्टम प्रभावित: सालाना 85,000 H-1B वीजा लॉटरी से मिलते हैं। फीस बढ़ने से आवेदन कम हो सकते हैं, लेकिन योग्य उम्मीदवारों को फायदा मिल सकता है।
कानूनी चुनौतियां: विशेषज्ञों का कहना है कि यह फीस अदालतों में चुनौती का सामना कर सकती है, क्योंकि यह कानूनी आव्रजन को सीमित करती है। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का यह हिस्सा है, जो पहले टर्म में भी H-1B पर सख्ती दिखा चुका था। अगर आपको और डिटेल्स चाहिए, जैसे भारतीय IT कंपनियों की प्रतिक्रिया, तो बताएं!

