हिंदू संगठनों और कुछ लोगों ने इसे माँ गंगा का अपमान बताते हुए आपत्ति जताई। कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज हुई, जिसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने और गंगा में प्रदूषण/कूड़ा फेंकने के आरोप लगे। पुलिस ने 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया है (जिनमें वीडियो बनाने वाला तहसीम भी शामिल बताया जा रहा है)। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं में दर्ज है।
कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इफ्तार में 15-20 लोग शामिल थे, और नाव पर फल, मेवा के साथ नॉन-वेज परोसा गया। यह घटना ईद से ठीक पहले (मार्च 2026 में रमजान के दौरान) सामने आई है, जिससे शहर में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की, और कई मीडिया चैनलों ने इसे कवर किया। गंगा में कूड़ा फेंकना पहले से ही एक बड़ा मुद्दा है—यहाँ नियमित रूप से फूल, प्लास्टिक, पूजा सामग्री आदि फेंकी जाती है, लेकिन इस मामले में धार्मिक संवेदनशीलता और नॉन-वेज का एंगल जुड़ने से विवाद बढ़ गया।







