नोएडा। फेज 1 थाना पुलिस ने रविवार को एक और फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मुख्य सरगना दो सगे भाइयों समेत चार की गिरफ्तारी हुई है। ये लोग स्पाइसजेट एयरलाइंस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर देश भर के युवाओं के साथ ठगी कर रहे थे। आरोपी 18 महीने से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे। पुलिस का अनुमान है कि ये ठग अब तक 500 से अधिक लोगों से रुपये ऐंठ चुके हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों पर देशभर से एनसीआरपी पोर्टल पर 20 शिकायतें मिली है। एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि फेज-1 थाना पुलिस को शनिवार रात करीब 8:30 बजे गश्त के दौरान सूचना मिली कि सेक्टर-2 स्थित सी-76 बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर एक कॉल सेंटर चल रहा है, जहां से लोगों को प्राइवेट नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की जा रही है।
सुदेश और बृजेश सगे भाई
सूचना के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। कमरे में चार लोग अलग-अलग टेबल पर बैठकर मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिये लोगों से बात कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपी बीसीए पास सुदेश सिंह (36), बृजेश भदौरिया (35) 12वीं पास, अर्जुन (23) 10वीं पास और मध्य प्रदेश का संदीप तिवारी (32) 12वीं है। सुदेश और बृजेश सगे भाई हैं।
पहले स्पाइसजेट में नौकरी कर चुका
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले दिल्ली में कॉल सेंटर खोलकर ठगी कर रहे थे। अब दो महीने से नोएडा में अड्डा बना लिया था। एक और गिरफ्तार आरोपी संदीप कुमार तिवारी पहले स्पाइसजेट में नौकरी कर चुका है। उसने दो साल पहले कंपनी छोड़ दी थी। पुलिस का मानना है कि एयरलाइन की भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों की जानकारी होने के कारण वह बेरोजगार युवाओं का भरोसा आसानी से जीत लेता था। उसी ने सगे भाइयों को साथ में लेकर ठगी की साजिश की थी।
जॉब साइटों से जुटाते थे बेरोजगारों का डेटा
आरोपियों ने बताया कि बेरोजगारो का डेटा जॉब वेबसाइटों से जुटाते थे। उन्हें फोन कर स्पाइस जेट एयरलाइंस में नौकरी दिलाने का झासा देते। पीड़ितों के वॉट्सऐप पर फर्जी जॉब ऑफर लेटर भेज देते। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर रकम अपने बैंक खातों में ट्रासफर करा लेते। ठगी में इस्तेमाल सिम को तोड़कर फेंक देते थे। आरोपियों के मोबाइल में स्पाइसजेट के नाम से तैयार फर्जी जॉब ऑफर लेटर मिले हैं।
ठगी के लिए मजदूरों के नाम पर लिए सिम
आरोपी अर्जुन अपने गांव के लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता और उन्हें ठगी में इस्तेमाल करता। बदले में लोगों को कुछ रुपये देते थे। साथ ही आरोपी ने अपने दोस्तों के नाम पर भी खाते खुलवाए थे। ये लोग मजदूरों, ड्राइवर के नाम पर सिम खरीदते थे। एक सिम से करीब 10 से 15 लोगों के साथ ठगी की जाती थी। हर दिन 30 से 40 हजार रुपये ठगी करने का टारगेट रखते थे। पुलिस आरोपियो की संपत्तियों की भी जांच करेगी।
क्या क्या बरामद
8 मोबाइल फोन, एक लेनोवो थिंकपैड लैपटॉप, 9 डेबिट कार्ड, 4 यूपीआई स्मार्ट साउड बॉक्स (पेटीएम और फोनपे), 13 सिम कार्ड, तीन म्यूल अकाउंट की पासबुक मिली है। पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन, सिम और बैंक खातों का मिलान एनसीआरपी पोर्टल से किया तो उनके खिलाफ अलग-अलग राज्यों से दर्ज 20 साइबर ठगी की शिकायतें मिली। पुलिस अन्य पीड़ितों से संपर्क कर और जानकारी जुटा रही है।

