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तानाशाही चाहे कितनी भी ताकतवर, खूंखार हो आखिरी में उसकी ही शिकस्त होती है

8 मई 2025 को प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद द्वारा फेसबुक पर लिखी गई पोस्ट को आधार बनाकर हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने उनको फोरी तौर पर जमानत पर रिहा करने का हुक्म भी सुना दिया है।

मुंह जबानी बातचीत तथा लिखित पोस्ट, वीडियो इत्यादि में लिखी पढ़ी, कही गई बातों में एक बड़ा फर्क यह होता है की मुंह जबानी बात में झूठ बोलने की बड़ी गुंजाइश रहती है, किंतु परंतु, मेरे कहने का गलत मतलब निकाला गया है, मैंने ऐसा कहा ही नहीं, वगैरा वगैरा का सहारा वार्तालाप मैं लिया जा सकता है। परंतु जब लिखा हुआ है, तो उसमें झूठ बोलने, दुराव छुपाव की गुंजाइश नहीं होती। प्रोफेसर अली खान की इस पोस्ट को पढ़ने पर एक मुल्क परस्त हिंदुस्तानी जो असुलन युद्ध की खिलाफत करता है, उसकी टीस इस पोस्ट में साफ नजर आती है। पोस्ट में पाकिस्तान उसके हुक्मरानों वहां की फौज, दहशतगर्दों के खिलाफत बिना किसी शक गुंजाइश के पढ़ने को मिलती है। परंतु इसी के साथ दक्षिणपंथी टिप्पणी कारो द्वारा कर्नल सोफिया की तारीफ करने वालों को यह सलाह भी दी कि भाजपा द्वारा फैलाई जा रही नफरत के शिकार लोगों को भारतीय होने के नाते संरक्षित भी किया जाए। इसी चुभने वाली बात को लेकर प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया गया। इसका सीधा-साधा मतलब हुआ जो मोदी सरकार की बुराई करेगा उसको जेल में डाल दिया जाएगा। जम्हूरियत के खात्मे, तानाशाही के शासन की यह जीती जागती मिसाल है। परंतु इतिहास इस बात का गवाह है कि कोई भी तानाशाही चाहे कितनी भी ताकतवर, खूंखार हो आखिरी में उसकी ही शिकस्त होती है।

राजकुमार जैन

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