चरण सिंह
वाह रे सुशासन बाबू दम्भ तो समाजवादी होने का भरते हैं, गैर संघवाद का भी नारा देते हैं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए बिल्कुल नहीं हिचक रहे हैं। कह रहे हैं कि 2024 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सबसे अधिक बिहार आए हैं। बिहार को तोहफे दिए हैं। तो क्या नीतीश कुमार उस तोहफे की बात कर रहे हैं जो महिलाओं को 10-10 हजार रुपए दिए गए हैं। तो फिर केजरीवाल और मोदी में क्या अंतर रह गया है ? मोदी तो दिल्ली में केजरीवाल पर फ्री की रेबड़ी बांटने का आरोप लगाते थे। नीतीश जी क्या यह 10-10 हजार की रेबड़ी नहीं है ? मोदी समाजवाद की मजाक उढ़ाते हैं और नीतीश मोदी की गोद में बैठकर समाजवादी बने फिर रहे हैं। इतना ही नहीं नीतीश मोदी की तारीफ करते हुए यह भी कह चुके हैं कि कोई नहीं है टक्कर में।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार का दिग्गज माना जाता है। वह नीतीश कुमार ही थे जिन्होंने न केवल शरद यादव बल्कि जार्ज फर्नाडिस को भी ठिकाने लगा दिया था। इतना ही नहीं बड़े भाई लालू प्रसाद को भी पटखनी दी। नीतीश ही हैं जो लालू राज को सबसे अधिक जंगल राज कहते हैं। वह बात दूसरी है कि नीतीश कुमार को बिहार पर राज करते हुए 20 साल हो गए हैं। आज भी रेप डकैती और हत्या के मामलों पर कोई अंकुश नहीं लगा है।
नीतीश कुमार की समझ में यह नहीं आ रहा है कि 2014 में जब एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार नरेंद्र मोदी को बनाया गया था तो सबसे अधिक मुखर खुद नीतीश कुमार ही हुए थे। एनडीए से नाता भी तोड़ लिया था। क्या यह सब कुछ मोदी भूल गए होंगे ? नीतीश को समझ लेना चाहिए कि बीजेपी ने उनके दोनों सिपहसालारों को अपने में मिला लिया है। चाहे ललन सिंह और या फिर संजय झा दोनों आजकल अमित शाह की भाषा बोलते हैं। गत दिनों खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ललन सिंह की तारीफ मंच से की थी। यदि एनडीए की सरकार बनती है तो जदयू को तो 2029 तक मोदी झेलेंगे पर नीतीश को नहीं। क्योंकि जदयू पर अब नीतीश की पकड़ कमजोर पड़ चुकी है।






