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एनडीए छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं नीतीश कुमार!

चरण सिंह
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपने को बड़ा दर्शाने की कोशिश करने वाले उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना मतलब नीतीश कुमार को खुश करना है। इसका मतलब है कि भले ही नीतीश कुमार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा न दिलवा पाए हों पर वह एनडीए नहीं छोड़ने वाले हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी भावना की कद्र करते हुए उनके लिए बिहार के लिए काम कर रहे हैं। नीतीश कुमार भी जानते हैं कि उनके पास इतने सांसदों की संख्या नहीं है कि वह सरकार गिरा सकें। ऐसे में सरकार के साथ रहकर अपना काम निकालना ही नीतीश कुमार अकलमंदी समझ रहे हैं।
दरअसल नीतीश कुमार भली भांति जानते हैं कि इंडिया गठबंधन में लालू प्रसाद उनकी एक न चलने देंगे। ऐसे में वह केंद्र सरकार से कुछ लेकर विधानसभा चुनाव का माहौल तो बना सकते हैं। विपक्ष के साथ तो उन्होंने बीजेपी के खिलाफ लामबंदी कर इंडिया गठबंधन का प्रयास करके देख लिया है। विपक्ष के नेताओं ने उन्हें एनडीए में जाने के लिए मजबूर कर दिया। नहीं तो इंडिया गठबंधन की पहली मीटिंग तो नीतीश कुमार के आवास पर ही हुई थी। वह नीतीश कुमार ही थे, जिन्होंने बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट किया था। चाहे सोनिया गांधी हों, राहुल गांधी हों, मल्लिकार्जुन खड़गे हों, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हों, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन हों, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हों, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हों, एनसीपी चीफ शरद पवार हों, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हों इन सभी नेताओं से नीतीश कुमार व्यक्ति रूप से जाकर मिले हैं।
देखने की बात यह है कि जब दिल्ली अशोका होटल में इंडिया गठबंधन की बैठक हुई तो पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अध्यक्ष पद के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम पेश कर दिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उनके पेश किये नाम का समर्थन किया। ऐसे में लालू प्रसाद यादव भी नीतीश कुमार के पक्ष में कुछ नहीं बोले। नीतीश कुमार बीच मीटिंग से उठे और सीधे एयरपोर्ट पहुंचकर पटना पहुंचे। राहुल गांधी की ओर से भी नीतीश कुमार को बनाने का कोई प्रयास नहीं हुआ। राहुल गांधी उस समय लालू प्रसाद के दबाव में माने जा रहे थे। नीतीश कुमार का प्रयास था कि सीटों का बंटवारा जल्द से जल्द हो जाए। ऐसे में लालू प्रसाद लगातार टालते रहे। ऐसे में कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार को मजबूर कर दिया किया कि वह इंडिया गठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल हो जाएं। इसमें भी दो राय नहीं कि टिकट बंटवारे में भी राहुल गांधी ने गंभीरता नहीं दिखाई। ऐसे में कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार भली भांति जानते हैं कि इंडिया गठबंधन में अब उनको कुछ नहीं मिलने वाला है। ऐसे में एनडीए में ही रहकर वह जदयू को मजबूत करने का प्रयास करेंगे। वैसे भी राजद में उनको लालू प्रसाद लगातार अपमानित करते रहते हैं। पीएम मोदी नीतीश कुमार की भावना का पूरा ध्यान रख रहे है।

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