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नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली का बयान: ‘तोड़फोड़ और आगजनी से बनी Gen-Z सरकार’

नेपाल में सितंबर 2025 की शुरुआत में हुई हिंसक ‘जनरेशन-जेड’ (Gen-Z) विरोध प्रदर्शनों ने देश की राजनीति को हिला दिया था। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) और आर्थिक असमानता के खिलाफ युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार को उखाड़ फेंका। 8 सितंबर को शुरू हुए ये प्रदर्शन 18 दिनों तक चले, जिसमें 19 से अधिक मौतें हुईं, सैकड़ों घायल हुए, संसद भवन और मंत्रियों के घरों में आग लगाई गई। पीएम केपी शर्मा ओली को 9 सितंबर को इस्तीफा देना पड़ा, और 12 सितंबर को पूर्व चीफ जस्टिस सुशिला कार्की को अंतरिम पीएम बनाया गया—यह फैसला Gen-Z प्रदर्शनकारियों के डिस्कॉर्ड वोट से लिया गया, जो दुनिया में पहली बार हुआ।
27 सितंबर 2025 को, यानी हिंसा के ठीक 18 दिन बाद, ओली ने पहली बार सार्वजनिक रूप से चुप्पी तोड़ी। उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए नई ‘Gen-Z सरकार’ पर तीखा प्रहार किया, इसे ‘तोड़फोड़ और आगजनी से बनी’ करार दिया। ओली ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में ‘षड्यंत्रकारियों’ ने घुसपैठ की, जिससे हिंसा भड़की। उन्होंने युवाओं को ‘मासूम चेहरे’ बताते हुए कहा कि उनकी आड़ में राजनीतिक धोखा हुआ।
ओली के बयान के मुख्य बिंदु:

हिंसा पर आरोप: प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण थे, लेकिन ‘षड्यंत्रकारियों’ ने आगजनी और तोड़फोड़ कराई। ओली ने दावा किया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया, और इसकी जांच होनी चाहिए।
Gen-Z सरकार पर हमला: उन्होंने नई अंतरिम सरकार को ‘कल्पित और खराब बयान’ से प्रेरित बताया, जो संविधान और संप्रभुता को खतरे में डाल रही है। ओली ने युवाओं से एकता की अपील की, लेकिन सरकार को ‘विनाशकारी’ कहा।
भावुक अपील: ओली ने मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि दी और कहा, “हमारे युवाओं की हत्या करने वाले षड्यंत्रकारियों को बेनकाब करना होगा।” उन्होंने संविधान दिवस (19 सितंबर) पर यह पोस्ट शेयर की।

ओली ने इस्तीफे के बाद 9 दिनों तक सेना की सुरक्षा में रहे, फिर निजी आवास पर चले गए। Gen-Z समूह ने ओली, गृह मंत्री रमेश लेखक और अन्य पर गोली चलाने का आरोप लगाकर गिरफ्तारी की मांग की है।

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