भारत ने अपने Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) के लिए इंजन डेवलपमेंट के लिए फ्रांस के साथ डील की है। यह जानकारी हाल के समाचारों और रक्षा विशेषज्ञों के हवाले से सामने आई है। फ्रांस की कंपनी सैफरान (Safran) के साथ भारत की Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Gas Turbine Research Establishment (GTRE) एक 110-125 kN थ्रस्ट वाले छठी पीढ़ी (6th generation) के जेट इंजन के संयुक्त विकास के लिए काम कर रही हैं। इस डील में पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) का सह-स्वामित्व शामिल है, जो भारत को भविष्य में स्वदेशी इंजन विकसित करने और अपग्रेड करने की स्वतंत्रता देगा।
प्रमुख बिंदु:
इंजन की विशेषताएं: यह नया इंजन AMCA Mk-2 के लिए होगा, जो सुपरक्रूज (बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति) और स्टील्थ क्षमताओं को सक्षम करेगा। यह इंजन 120-130 kN तक थ्रस्ट प्रदान कर सकता है, जो इसे मौजूदा GE F414 इंजन (98 kN) से अधिक शक्तिशाली बनाता है, जो AMCA Mk-1 में उपयोग होगा।
फ्रांस के साथ सहयोग: सैफरान ने भारत को M88 इंजन (जो राफेल जेट में उपयोग होता है) के आधार पर एक नया इंजन डिजाइन करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें वेरिएबल साइकिल इंजन (VCE) तकनीक शामिल हो सकती है, जो ईंधन दक्षता, थ्रस्ट और थर्मल मैनेजमेंट में सुधार लाती है। यह तकनीक छठी पीढ़ी के जेट्स के लिए महत्वपूर्ण है।
चीन से तुलना: यह इंजन AMCA को चीन के J-20 स्टील्थ फाइटर (जो WS-15 इंजन का उपयोग करता है) के मुकाबले अधिक शक्तिशाली और तकनीकी रूप से उन्नत बनाएगा। WS-15 की तुलना में सैफरान का प्रस्तावित इंजन बेहतर प्रदर्शन और विश्वसनीयता प्रदान कर सकता है, खासकर सुपरक्रूज और स्टील्थ फीचर्स में।
सामरिक महत्व: यह डील भारत की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देगी। सैफरान के साथ सहयोग से भारत को न केवल इंजन निर्माण की क्षमता मिलेगी, बल्कि भविष्य में स्वदेशी इंजन डिजाइन करने की तकनीकी जानकारी भी प्राप्त होगी। यह भारत को पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका) पर निर्भरता कम करने और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाने में मदद करेगा।
अन्य देशों से तुलना:
अमेरिका: GE F414 इंजन के लिए भारत को 80% तक ToT की पेशकश की गई थी, लेकिन अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों के कारण पूर्ण स्वायत्तता सीमित थी।
रूस: रूस ने 177S इंजन (142 kN) की पेशकश की थी, जो AMCA के लिए उपयुक्त है, लेकिन भारत ने रूसी इंजन को प्राथमिकता नहीं दी, संभवतः भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और सीमित ToT के कारण।
यूके: रोल्स-रॉयस ने भी EJ200 इंजन (110-120 kN) के साथ सहयोग का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सैफरान की पेशकश को अधिक व्यापक ToT और रणनीतिक विश्वसनीयता के कारण चुना गया।
डील का प्रभाव:
यह डील भारत के रक्षा क्षेत्र में हाई-टेक नौकरियों और स्वदेशी एयरोस्पेस उद्योग को बढ़ावा देगी।
AMCA Mk-2 का इंजन न केवल भारत के लिए, बल्कि भविष्य में निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर इंजन निर्माण में एक खिलाड़ी बन सकता है।
यह डील भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को और मजबूत करेगी, जो पहले से ही राफेल जेट्स और स्कॉर्पीन पनडुब्बी जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से स्थापित है।
समयसीमा:
प्रोटोटाइप रोलआउट: 2026-27 तक।
पहली उड़ान: 2028 तक।
प्रमाणन: 2032 तक।
उत्पादन शुरू: 2035 तक।
यह डील भारत के लिए एक रणनीतिक जीत है, जो न केवल AMCA को विश्वस्तरीय बनाएगी, बल्कि भारत को जेट इंजन तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।25 web pages4.8sHow can Grok help?

