नारायणी साहित्य अकादमी ने प्रोफ़ेसर नामवर सिंह का जन्मोत्सव आयोजित किया। अकादमी के उत्तर प्रदेश शाखा का यह भव्य आयोजन वहां के अध्यक्ष प्रदीप मिश्र अजनबी के सानिध्य में आयोजित किया गया। दिल्ली प्रदेश की अध्यक्ष माही मुंतजिर अपने समूह के साथ बहुत ही सुंदर ढंग से प्रोग्राम का संयोजन किया। संचालक ललित मोहन जोशी के संचालन में बहुत ही सारगर्भित तरीके से विधिवत रूप से मां आदिशक्ति श्री भवानी सरस्वती के समक्ष सभी अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया। उसके उपरांत डा.कविता सिंह प्रभा ने मधुर स्वर में मां की वंदना की,वह इस आयोजन की विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थी।डा.कुसुम वियोगी वरिष्ठ साहित्यकार को साहित्य श्री सम्मान से सम्मानित किया गया। आमंत्रित वक्ता डा.जनार्दन यादव एवं डा.कविता प्रभा ने अपना वक्तव्य दिया जिससे आज की युवा पीढ़ी को नामवर सिंह को जानने समझने का मौका मिला।इस प्रकार से प्रथम सत्र के समापन से पहले डा.उपासना दीक्षित को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।उनका कार्यकाल एक अगस्त से आरंभ होगा।

और उत्तर प्रदेश के वर्तमान अध्यक्ष को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया। अकादमी की राष्ट्रीय संरक्षक डा.कुसुम जोशी जी के द्वारा नियुक्ति पत्र दिया गया, उनके साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति रही।
आयोजन के दूसरे सत्र में काव्य पाठ का आरंभ हुआ।सबसे पहले एक आठ वर्षीय तृतीय कक्षा की छात्रा ने अपनी कविता का पाठ किया।वह अमेरिका में पैदा हुई है और वही पली बढ़ी है। फिर भी बहुत ही सुंदर और सार्थक रचना को सहजता पूर्वक पढ़ा। हिंदी के प्रति समर्पित उसके जज्बे को सभी ने बहुत सराहा। चुन्नी और मेडल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करते हुए अकादमी की अध्यक्षा ने ढेर सारी शुभकामनाएं दी।
सभी कवियों ने बहुत ही सुंदर और सार्थक कविताएं पढ़ी। रामप्रसाद दूबे, हुमा देहलवी, साहिल संन्यासी,पूनम सिंह, माही मुंतजिर, तरुण तरंग,भारत विश्वकर्मा,एवं अन्य सभी कवियों एवं कवयित्रियों ने अपने काव्य पाठ से बहुत ही ज्यादा आनंदित किया।
दिनेश आनंद गीतकार के गीतों ने सभी का मन मोह लिया नारी के ऊपर श्रेष्ठ रचनाएं पढ़ी गई।
आयोजन के अध्यक्ष डा.कुसुम वियोगी ने अपने श्रृंगार के गीतों को सभी मंत्र मुग्ध हो सुन रहे थे।
एक श्रेष्ठ और सफल आयोजन का श्रेय माही मुंतजिर के सहभागी सभी अकादमी के युवा समूह को जाता है। ग्यारह बजे से आयोजित कार्यक्रम रात्रि में आठ बजे तक चला। दिन में जलपान की व्यवस्था के साथ साथ दोपहर में स्वादिष्ट भोजन की उत्तम व्यवस्था भी किया गया था। युवा पीढ़ी में प्रोफेसर नामवर सिंह को समझने की जानने की तीव्र इच्छा को महसूस करते हुए। गाजियाबाद से पधारे राजपूत सभा के अध्यक्ष,श्रेष्ठ अतिथि के रूप में आयोजन के अंत तक उपस्थित रहे और। अकादमी के युवा कवियों का हौसला बढ़ाते हुए। अपनी संस्था द्वारा भविष्य में कवि सम्मेलन आयोजित करवाने का निमंत्रण भी दिया। हर्षोल्लास के साथ उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए आयोजन समापन किया।
आयोजन के दूसरे सत्र में काव्य पाठ का आरंभ हुआ।सबसे पहले एक आठ वर्षीय तृतीय कक्षा की छात्रा ने अपनी कविता का पाठ किया।वह अमेरिका में पैदा हुई है और वही पली बढ़ी है। फिर भी बहुत ही सुंदर और सार्थक रचना को सहजता पूर्वक पढ़ा। हिंदी के प्रति समर्पित उसके जज्बे को सभी ने बहुत सराहा। चुन्नी और मेडल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करते हुए अकादमी की अध्यक्षा ने ढेर सारी शुभकामनाएं दी।
सभी कवियों ने बहुत ही सुंदर और सार्थक कविताएं पढ़ी। रामप्रसाद दूबे, हुमा देहलवी, साहिल संन्यासी,पूनम सिंह, माही मुंतजिर, तरुण तरंग,भारत विश्वकर्मा,एवं अन्य सभी कवियों एवं कवयित्रियों ने अपने काव्य पाठ से बहुत ही ज्यादा आनंदित किया।
दिनेश आनंद गीतकार के गीतों ने सभी का मन मोह लिया नारी के ऊपर श्रेष्ठ रचनाएं पढ़ी गई।
आयोजन के अध्यक्ष डा.कुसुम वियोगी ने अपने श्रृंगार के गीतों को सभी मंत्र मुग्ध हो सुन रहे थे।
एक श्रेष्ठ और सफल आयोजन का श्रेय माही मुंतजिर के सहभागी सभी अकादमी के युवा समूह को जाता है। ग्यारह बजे से आयोजित कार्यक्रम रात्रि में आठ बजे तक चला। दिन में जलपान की व्यवस्था के साथ साथ दोपहर में स्वादिष्ट भोजन की उत्तम व्यवस्था भी किया गया था। युवा पीढ़ी में प्रोफेसर नामवर सिंह को समझने की जानने की तीव्र इच्छा को महसूस करते हुए। गाजियाबाद से पधारे राजपूत सभा के अध्यक्ष,श्रेष्ठ अतिथि के रूप में आयोजन के अंत तक उपस्थित रहे और। अकादमी के युवा कवियों का हौसला बढ़ाते हुए। अपनी संस्था द्वारा भविष्य में कवि सम्मेलन आयोजित करवाने का निमंत्रण भी दिया। हर्षोल्लास के साथ उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए आयोजन समापन किया।
एक साहित्य महोत्सव जियन पुर के नामवर देश में तो स्थापित हैं। विश्व स्तर पर हिन्दी के प्रख्यात साहित्यकार,समालोचक एवं वाचिक परम्परा के सजग प्रहरी के रूप में स्वयं के श्रेष्ठ सृजन द्वारा अपनी अलग पहचान बनाई है।








