बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन (क्रैम्प) आना एक सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन अगर यह लगातार हो रही है, तो यह कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। ज्यादातर मामलों में क्रैम्प डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन (जैसे पोटैशियम, कैल्शियम या मैग्नीशियम की कमी), ज्यादा थकान या दवाओं के साइड इफेक्ट्स से होते हैं। लेकिन अगर क्रैम्प रात में ज्यादा हों या हाथ-पैरों के अलावा धड़कन में भी महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच जरूरी है।
संभावित बीमारियां जिनका संकेत हो सकता है बार-बार क्रैम्प:
डायबिटीज या नर्व-संबंधी बीमारियां: डायबिटीज, लिवर या थायराइड की समस्या से नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे क्रैम्प बढ़ जाते हैं। इलेक्ट्रोलाइट या हार्मोनल डिसऑर्डर: पोटैशियम या कैल्शियम की कमी से मांसपेशियां प्रभावित होती हैं।
मोटर न्यूरॉन डिजीज (जैसे ALS): इसमें क्रैम्प शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है।
स्पाइनल नर्व प्रेशर या वस्कुलर डिजीज: रीढ़ की हड्डी में नर्व दबाव या धमनियों में संकुचन से क्रैम्प हो सकते हैं। क्रैंप-फैसिकुलेशन सिंड्रोम: नसों की अतिसक्रियता से मांसपेशियों में ऐंठन और झटके आते हैं।
लीवर या किडनी की बीमारी: लिवर फेलियर या डायलिसिस से टॉक्सिन्स जमा होकर क्रैम्प का कारण बनते हैं। डिस्टोनिया: अनियंत्रित मांसपेशी गतिविधियां जो दर्दनाक स्पाज्म का रूप ले लेती हैं।

