इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आर्मी के हाथों में असली सत्ता मानी जाती है। पाक आर्मी चीफ को वास्तविक शासक कहा जाता है लेकिन अब देश इससे भी आगे बढ़ गया है। पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से बहुत केंद्रीकृत मिलिट्री कमांड स्ट्रक्चर की ओर कदम बढ़ाया है। इसके तहत सेना, नौसेना और एयरफोर्स को असीम मुनीर के नेतृत्व वाले ढांचे के अधीन लाया गया है। मुनीर पहले ही सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के तौर पर काम कर रहे हैं।
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट ने 20 अगस्त को डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026 और नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट 2010 में संशोधनों को मंजूरी दी है। यह कदम 2025 में किए गए उन संवैधानिक बदलावों के अनुरूप है, जिनके तहत CDF का पद बनाया गया था और जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद खत्म किया गया था।
मुनीर सबसे ताकतवर शख्स
भारत के साथ बीते साल मई में चार दिन की सैन्य झड़प के बाद फील्ड मार्शल और फिर दिसंबर में पाकिस्तान के पहले CDF बने मुनीर अब पाक मिलिट्री कमांड स्ट्रक्चर के केंद्र में हैं। नया कानून उन्हें ऐसी ताकत देता है, जो किसी सर्विस चीफ की पारंपरिक भूमिका से ज्यादा है। मुनीर राष्ट्रीय रक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों पर प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार हैं। वे सेना पर ऑपरेशनल कमांड और कंट्रोल रखते हैं।
इंडिया टुडे के मुताबिक, डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के मुख्य केंद्र (नर्व सेंटर) के तौर पर एक डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर बनाता है और इसे CDF की कमांड और अधिकार के तहत रखता है। इससे मुनीर को एक स्थायी संस्थागत तंत्र मिलता है। इसके जरिए वे सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ-साथ जॉइंट, स्ट्रैटेजिक और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स में तालमेल बिठा सकते हैं।
असीम मुनीर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर अपने प्रधानमंत्री को सलाह दे सकते हैं और सशस्त्र बलों में सैन्य फैसलों के अमल की निगरानी कर सकते हैं। राजनीतिक प्रभाव और ऑपरेशनल कमांड का मेल उनको शांति और संकट, दोनों स्थितियों में सलाहकार और कार्यकारी भूमिका देता है।
नए कानून में क्या है
यह कानून CDF को जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और स्ट्रैटेजिक डोमेन में तीनों सेनाओं के एकीकरण, ऑपरेशनल तालमेल और कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपता है। ये दिखाता है कि पाकिस्तान अब तीनों सेनाओं के अलग-अलग कमांड स्ट्रक्चर के जरिए काम करने के तरीके से हट रही हैं। पाकिस्तान अब मुनीर के नेतृत्व में एक ढांचे की ओर बढ़ रहा है।
मुनीर की ताकत सैन्य कर्मियों तक फैली हुई है। यह एक्ट उनको कर्मियों को रिटायर करने, रिलीज या डिस्चार्ज करने, इस्तीफे स्वीकार या अस्वीकार करने, लोगों को सेवा में बनाए रखने और कानून की सीमाओं के भीतर रिटायरमेंट की उम्र या सेवा की शर्तों में ढील देने की इजाजत देता है। इससे पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं के ढांचे का नियंत्रण मुनीर के हाथों में आ जाता है।
क्लियर कमांड पर असर
इन बदलावों का पाकिस्तान के स्ट्रैटेजिक और न्यूक्लियर कमांड ढांचे पर भी असर होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि हर न्यूक्लियर फैसला सीधे CDF लेगा लेकिन नए स्ट्रैटेजिक कमांड सिस्टम बनाने से पुराने जॉइंट-सर्विसेज ढांचे का महत्व कम हो जाता है और आर्मी के नेतृत्व वाले सिस्टम का महत्व बढ़ जाता है।
नई दिल्ली में सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या पाकिस्तान का डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर सच में ऑपरेशनल नर्व सेंटर बनता है या मौजूदा कंट्रोल का सिर्फ कानूनी रीब्रांडिंग बनकर रह जाता है।

