Site icon Thenews15.in

मोदी को एहसास कराना है वाराणसी में बीजेपी प्रत्याशी को हराना !

चरण सिंह राजपूत 

भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई को लेकर कितनी भी सफाई दी जाती रही हो पर समय-समय पर दोनों दिग्गजों के अपनी ताकत का एहसास कराने की खबरें सामने आ ही जाती हैं। विधानसभा चुनाव में इन सबके अंदेशे के चलते जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में डेरा डाले रहे तो एमएलसी चुनाव में उनके संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी सुदामा पटेल का तीसरे नंबर पर आना उनको नीचा दिखाने के रूप में देखा जा रहा है। खुद सुदामा पटेल का कहना है कि भाजपा नेता उन्हें न लड़ाकर जीत दर्ज करने वाली बृजेश सिंह की पत्नी को चुनाव लड़ा रहे थे।
दरअसल उत्तर प्रदेश के विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने अधिकतर सीटों पर जीत हासिल की है। पर भाजपा के गढ़ और पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में वह जीत न दर्ज कर सकी।  यहां पर भाजपा के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे हैं। इस सीट से बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह जीती हैं। बताया जा रहा है कि ब्रिजेश सिंह की पत्नी को भाजपा ने ही जिताया है। मतलब मोदी को एहसास कराने के लिए उत्तर प्रदेश भाजपा ने अपना ही प्रत्याशी हरवा दिया। उधर वाराणसी से भाजपा उम्मीदवार सुदामा पटेल ने पहले ही हार की आशंका जाहिर कर दी थी।  उन्होंने गत दिनों मीडिया से बातचीत में कहा था कि पार्टी के नेता उनका साथ नहीं दे रहे हैं वे लोग माफिया बृजेश सिंह की पत्नी का समर्थन कर रहे हैं।  दरअसल भाजपा में अब नंबर एक नेता के लिए जंग शुरू हो गई है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नंबर एक का दर्जा कायम रखना चाहते हैं और अपने बाद में अपने सारथी अमित शाह को यह दर्जा सौंपने की फिराक में हैं तो वहीं भाजपा की एक बड़ी लॉबी योगी आदित्यनाथ को मोदी के विकल्प के रूप में देखने लगी है। ऐसे में आरएसएस का भी हाथ योगी आदित्यनाथ के ऊपर बताया जा रहा है। उधर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार गिराने की संख्या में सांसद उनके साथ होने की बात कर एक अलग ही संदेश दिया है।
गत दिनों जब सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस हाइवे के उद्घाटन अवसर पर योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीछे चलते हुए तस्वीर वायरल हुई थी तो मेादी औेर योगी के बीच सब कुछ ठीकठाक न चलने की बात सामने आई थी। चुनाव हारने के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य को उप मुख्यमंत्री और पूर्व आईएएस अरविंद शर्मा को योगी के कैबिनेट में जगह दिलाना मोदी को मोदी के योगी के काम में हस्तक्षेप के रूप में देखा गया है।

Exit mobile version