Memoir : साल 2001 की, सुशील मोदी के साथ की उस पल की

सुशील मोदी को याद कर भावुक हुए अनशनकारी
 उनके व्यक्तित्व एवं बेबाक कार्यशैली के कायल हैं लोग

दीपक कुमार तिवारी 

पटना।बात साल 2001 की है।सूबे के मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के दो दर्जन नौजवान पीयर उच्च विद्यालय के प्रांगण में बूढ़ी गंडक नदी में रतवारा-पिलखी घाट पर सड़क पुल निर्माण की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे।संघर्ष के नेतृत्वकर्ता श्याम किशोर ने मंगलवार को उस पल को याद करते हुए बताया कि हम सबकी ना समझी यह थी कि तब इस मांग को काफी जिद्दीपन तरीकों से अंजाम देना शुरू कर दिया। जिद्द में जान भी जा सकती है। इससे हम सब अनभिज्ञ थे।

नए जोश के साथ हम सबने आमरण अनशन शुरु किया। तीसरे दिन बीत गए,लेकिन कोई इसे गम्भीरता से लेने और हाल पूछने वाला भी नहीं था। 3 दिनों बाद कुछेक पदाधिकारी और जिला स्तरीय राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्त्ता गण आकर हम सबकी हौसला आफजाई कर गए।
आंदोलन को ख़ूब जनसमर्थन मिला, लेकिन सत्ता पक्ष हम सबकी सुधि लेने को तैयार नहीं।जिसकारण अनशन तुरबाने के लिए कोई राजी नहीं थे। तब की सरकार में मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं।श्यामकिशोर कहते हैं कि तब कहा जाता था कि सड़क पुल – पुलिया और गांव देहात की विकास का एजेंडा उन सरकार की सोच से बाहर थी।

इधर हमलोग आमरण अनशनकारी मर-मिटने से लेकर आत्मदाह या जलसमाधि जैसे फैसले पर आमादा थे।भूखे-प्यासे तबियत बिगड़ गयी। हम सबकी मरणासन्न अवस्था हो गयी। इस बीच स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रयासों से तब राबड़ी सरकार में नेता प्रतिपक्ष सुशील मोदी का आगमन अनशन स्थल पर हुई।

उन्होंने अपनी बहुत हीं सधे प्रभाव से हमें अनशन तोड़ने के लिय राजी कर लिया और आश्वासन दिया कि हम सबकी सरकार बनेगी तो हम आपकी मांग को अवश्य पूरा करेंगे। बार बार बेहोशी की हालत में उन्होंने हमे गले लगाकर जो सम्मान दिया।मांग और आंदोलन की बारीकियों को समझाया। उस अविस्मरणीय पल को आज याद करते हुए मेरा हृदय भाव विह्वल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि इसके बाद हीं पिलखी पुल का सौगात हम सबको मिला। इसके लिय हम सब उनका सदैव ऋणी रहेगें। बताया कि साल 2001 में 2अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर पीयर उच्च विद्यालय में राष्ट्रीय युवा जागृति संघ के बैनर तले क्षेत्र के साथियों के साथ आमरन अनशन शुरु हुआ और 8 अक्टूबर 2001 को वे अनशन स्थल पर पहुंचे थे। उन्होने क्षेत्र की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए व्यापक जनसंवाद स्थापित किया।\

नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से उन्होंने ठोस आश्वासन देकर तथा जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।अनशनकारियों की नाजुक स्थिति को देखते हुए अनहोनी की चिन्ता सबमें छा गईं थी। अनशनकारियों को देखकर लोगों के आंखों में आसूं थी यह सब देख वे भी द्रवित हो गए।बाद में भाजपा-जदयू की सरकार बनी तो पिलखी पुल निर्माण कराया गया,हालांकि रतवारा-रैनी घाट पर पुल निर्माण की मांग जांच आदि प्रक्रियाओं के बाबजूद आज भी लंबित है।

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