मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक शख्स के खिलाफ अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि शादी से जुड़े एक समझौते के आधार पर अपने खिलाफ दर्ज गंभीर आपराधिक मामले रद्द करवाने के बाद उसने पत्नी को छोड़ दिया और कोर्ट के आदेश के मुताबिक आर्थिक मदद देना भी बंद कर दिया। कोर्ट ने प्रतिवादी पति को आदेश दिया है कि वह बताए कि उसके खिलाफ अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
यह मामला साल 2021 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। इसमें रेप और नशीला पदार्थ खिलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
बंद की आर्थिक मदद
केस दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों ने निकाह किया और अप्रैल 2022 में एक समझौता साइन किया। इसके आधार पर कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही रद्द की थी। समझौते के तहत पति को घर का पूरा खर्च उठाना था और पत्नी को हर महीने 25 हजार रुपये भत्ता देना था। हालांकि याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि केस रद्द होते ही पति ने सभी भुगतान बंद कर दिए। महिला का आरोप है कि उसके साथ क्रूरता की गई और बाद में छोड़ दिया गया।
पति पर वादाखिलाफी के आरोप
कोर्ट ने दोनों पक्षों में सुलह कराने की कई कोशिश की लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर रजिस्टर्ड डाक और वॉट्सऐप के जरिए तलाक का नोटिस भेज दिया। बाद में उसने दूसरी महिला से शादी भी कर ली। जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों से राहत मिलने के बाद प्रतिवादी ने समझौते की शर्तों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

