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तमिलनाडु सीएम थलपति विजय की सुप्रीम कोर्ट में बहुत बड़ी जीत, करूर भगदड़ केस में मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति सी जोसेफ विजय को निजी तौर पर बहुत राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को करूर भगदड़ हादसे के पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने पर रोक लगाने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की ओर से मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद यह अंतरिम आदेश जारी किया है।

‘हाई कोर्ट कैसे दखल दे सकता है?’

 

इस केस में तमिलनाडु सरकार की ओर से कांग्रेस नेता और सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी और सीनियर वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि ‘अगर सरकार मौत के बाद अनुच्छेद 162 के तहत नीतिगत फैसले से कुछ देना (दया के आधार पर नौकरी) चाहती है, तो हाई कोर्ट कैसे दखल दे सकता है? ‘

 

‘यहां राजनीति मत लाइए’

 

इस दौरान एक राजनीतिक दल की ओर से एडवोकेट वेलन ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी राज्य की मर्जी से नहीं हो सकती। उन्होंने दलील दी कि जो पार्टी भगदड़ के लिए जिम्मेदार थी, वही आज राज्य में सत्ता में है। उनके मताबिक इसलिए यह ‘हितों के टकराव’ का मामला है। जब अदालत ने पूछा कि वह किसकी ओर से पेश हो रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक दल की ओर से।
इसपर जस्टिस पारदीवाला ने सवाल किया कि यहां राजनीतिक दल का क्या रोल है।
इसपर जस्टिस चंद्रन ने कहा, ‘यहां राजनीति मत लाइए।’

‘पीड़ितों को रोजगार दे रही है तो दिक्कत क्या है’

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि एक हादसे के पीड़ितों को सरकार अगर रोजगार दे रही है तो इसमें क्या दिक्कत हो सकती है।
भगदड़ हुई, बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी,सैकड़ों लोगों की मौत हो गई। अब अगर सरकार यह निर्णय लेती है कि परिवार के लोगों को कुछ मदद दी जाए,और मान लीजिए कि पैसे के रूप में मुआवजा देते, तो क्या आप उस पर आपत्ति करते?

जस्टिस जेबी पारदीवाला, सुप्रीम कोर्ट

‘अकेले कमाई वाले की मौत हो जाए तो क्या होगा’

जस्टिस पारदीवाली ने आगे कहा, ‘सरकार की नीति पर सवाल उठाने वाले आप कौन हैं, कि किसी को रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। मान लीजिए, भगदड़ में परिवार के अकेले कमाने वाली की मौत होती है और परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है, तो सरकार को बेटा या बेटा या पत्नी को उनके शैक्षणिक योग्यता के आधार पर क्या कोई रोजगार नहीं देना चाहिए।’

 

मद्रास हाई कोर्ट ने क्यों लगाई थी नियुक्तियों पर रोक
दरअसल, 27 जुलाई, 2026 को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने करूर हादसा पीड़ित परिवार के सदस्यों को नौकरी देने वाले तमिलनाडु सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी।
हाई कोर्ट के मुताबिक इस तरह की नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन हैं।
हाई कोर्ट ने कहा था कि यदि मौजूदा केस में अनुकंपा के आधार र नियुक्ति की अनुमति दी जाती है तो ऐसे रोजगारों की मांग की बाढ़ आ जाएगी।
अदालत ने आतिशबाजी और वाहन दुर्घटनाओं का उदाहरण दिया और कहा कि यहां भी सरकारी नाकामी के चलते जाने जा सकती हैं, लेकिन पीड़ितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं, बल्कि सिर्फ राहत के तौर पर मुआवजे दिए जाते हैं।
तमिलनाडु में करूर हादसा कब हुआ
तमिलनाडु के करूर में भगदड़ की वजह से 27 सितंबर, 2025 को बड़ा हादसा हुआ था।
करूर हादसे में करीब 40 लोग मारे गए थे और लगभग 80 लोग जख्मी हो गए थे।
करूर भगदड़ तब अभिनेता से नेता बनने की कोशिश कर रहेतमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की टीवीके पार्टी की रैली में मची थी।

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