जैतपुर । किसान संघर्ष मोर्चा की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आज किसान सभा के दफ्तर, जैतपुर में आयोजित हुई। बैठक में किसानों की लंबित समस्याओं, पुलिस-प्रशासन द्वारा लगातार दिए जा रहे आश्वासनों और प्राधिकरणों की कथित उदासीनता पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर विशाल धरना-प्रदर्शन एवं घेराव किया जाएगा। किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में 17 जुलाई को 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट सहित किसानों के अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन किया गया था। उस समय पुलिस के आला अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि एक सप्ताह के भीतर तीनों प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ किसानों की वार्ता कराई जाएगी। इसके बाद पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन किसानों की समस्याओं पर आज तक कोई वार्ता नहीं हो सकी।
इसके विरोध में किसान संघर्ष मोर्चा ने 17 अगस्त को आंदोलन का ऐलान किया। 17 अगस्त को पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर किसान संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं को घरों में नजरबंद किया गया, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गोलचक्कर पर किसानों पर लाठीचार्ज किया गया तथा बड़ी संख्या में किसानों को गिरफ्तार किया गया। ग्रामीणों को भयभीत करने के उद्देश्य से उनके घरों पर पांच-पांच लाख रुपये के मुचलके के नोटिस भेजे गए।
इसके बावजूद किसान संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पूरी बहादुरी और अनुशासन के साथ आंदोलन जारी रखा तथा किसान सभा के जैतपुर कार्यालय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए पुलिस का अत्याचार सहते हुए सैकड़ों की संख्या में गिरफ्तारी दी। किसानों के इस दबाव के चलते पुलिस कमिश्नर के साथ दो घंटे से अधिक लंबी वार्ता हुई। वार्ता में पुलिस कमिश्नर ने 18 अगस्त को तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के साथ बैठक की तारीख तय करने तथा किसानों के अन्य मुद्दों पर चर्चा के संबंध में जानकारी देने का आश्वासन दिया।
लेकिन 18 अगस्त से लेकर 25 अगस्त तक लगातार तारीख पर तारीख दी जाती रही। 19, 20, 21, 22, 23, 24 और 25 अगस्त तक किसानों को आश्वासन दिया जाता रहा और अब 25 अगस्त को बताया गया कि 27 अगस्त को वार्ता होगी। वह वार्ता भी केवल पुलिस कमिश्नर के स्तर पर होगी, जिसमें मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के साथ किसानों की वार्ता कब होगी इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया है जिससे किसानों में आक्रोश फैल गया है।
किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने किसानों के पूरे दो महीने झूठे आश्वासनों में बर्बाद कर दिए, जबकि किसानों की मूल समस्याओं पर अभी तक किसी भी स्तर पर कोई वार्ता नहीं हुई है। यह हजारों किसानों की भावनाओं और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों उनके मुद्दों का खुला अनादर है।
मोर्चा ने कहा कि पुलिस की लगातार कार्यप्रणाली से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस प्रशासन किसानों की समस्याओं का समाधान कराने के बजाय उन्हें केवल दबाने और आंदोलन को टालने की कोशिश कर रहा है। किसानों का आरोप है कि वर्षों से इसी प्रकार आश्वासन देकर उनके मुद्दों को टाला जाता रहा है, जबकि प्राधिकरणों के अधिकारी पुलिस बल के संरक्षण में किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि नोएडा में किसानों के कोटे के हजारों प्लॉट बिल्डरों को आवंटित किए जा चुके हैं, जबकि किसानों से अब कहा जा रहा है कि डेढ़ लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर की जमीन के बदले मात्र साढ़े 22 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर लेकर मामला समाप्त कर दिया जाए। किसान संघर्ष मोर्चा ने इसे किसान विरोधी और जनविरोधी नीति बताते हुए कहा कि किसान अपने अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।
मोर्चा ने कहा कि लखनऊ स्तर पर भी तीनों प्राधिकरणों के अधिकारी शासन और माननीय मुख्यमंत्री को यह बताकर गुमराह करते हैं कि प्राधिकरणों में किसानों की कोई समस्या नहीं है, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।
किसानों के अनुसार वर्तमान में नोएडा में लगभग 3,800, ग्रेटर नोएडा में 854 और यमुना प्राधिकरण में लगभग 900 आबादी संबंधी प्रकरण लंबित हैं। ग्रेटर नोएडा में अभी भी 500 से अधिक किसान 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे से वंचित हैं। पिछले लगभग 14 वर्षों से सर्किल रेट में कोई प्रभावी वृद्धि नहीं हुई है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को मिलने वाले मुआवजे में भी वृद्धि नहीं हुई।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारी निजी कॉलोनाइजरों के साथ मिलीभगत कर अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा दे रहे हैं और दूसरी ओर किसानों को उनके वाजिब अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारियों का एकमात्र मकसद किसानों को दबाना, बिल्डरों को फायदा पहुंचाना और शासन को गुमराह करना रह गया है।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि किसानों के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। अधिकारी लगातार झूठे आश्वासन देते हैं और हर दिन किसानों के साथ वादाखिलाफी की जा रही है। अब किसान अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करेंगे।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा लगातार पूरे धैर्य, अनुशासन और शांति के साथ लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आंदोलन कर रहा है। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन किसानों के प्रति न केवल असंवेदनशील हैं, बल्कि किसानों पर मुकदमे दर्ज करने, लाठीचार्ज करने, गिरफ्तारियां करने और उन्हें दबाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 17 अगस्त को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसानों के धरना स्थल पर मिट्टी डालकर उसे कब्जे में लेने की कार्रवाई पूरी तरह गैरकानूनी, असंवैधानिक और गैरलोकतांत्रिक थी। किसान इस तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।
किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा 10 प्रतिशत प्लॉट, नए कानून, आबादी के मामलों और किसानों के अन्य सभी मुद्दों पर पूरी गंभीरता से संघर्ष कर रहा है। वर्ष 2023 के किसान आंदोलन के परिणामस्वरूप 10 प्रतिशत प्लॉट का प्रस्ताव प्राधिकरण बोर्ड से पास कराकर शासन के अनुमोदन के लिए भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पद पर आए लगभग तीन वर्ष हो चुके हैं, लेकिन तमाम आश्वासनों के बावजूद आबादी का एक भी मसला हल नहीं किया गया। वर्ष 2023 में सर्किल रेट के रिवीजन का वादा किया गया था, जो आज तक अधूरा है।
किसान परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता उदल आर्य ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा की लड़ाई अब आर-पार की है। उन्होंने भाजपा सरकार और उसके अधिकारियों पर किसान विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि गौतमबुद्ध नगर के भाजपा के जनप्रतिनिधि किसानों के मुद्दों पर पूरी तरह निष्क्रिय हैं और किसानों पर हो रहे पुलिस अत्याचार के खिलाफ भी आवाज नहीं उठाते।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता उम्मेद त्यागी ने कहा कि किसानों की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। किसान हर तरह की कुर्बानी देने को तैयार हैं, लेकिन अपने अधिकारों और मुद्दों को जीतकर ही दम लेंगे।
9 सितंबर को होगा निर्णायक प्रदर्शन
किसान संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। 9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। मोर्चा ने तीनों प्राधिकरणों और शासन से मांग की कि किसानों की सभी लंबित समस्याओं पर तत्काल गंभीरता से वार्ता कर समाधान की ठोस प्रक्रिया शुरू की जाए।
मोर्चा ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और सरकार तथा प्रशासन को किसानों की आवाज सुननी ही होगी।
बैठक में उपस्थित
सुखबीर खलीफा, सोरन प्रधान, डॉ. रुपेश वर्मा, संदीप भाटी, उदल आर्य, उम्मीद त्यागी, सुशांत भाटी, सुशील सिंहपुर, सुरेश यादव, अशोक भाटी, सुमित एडवोकेट, मोनू मुखिया, निशांत रावल, सचिन एडवोकेट सहित किसान संघर्ष मोर्चा की कोर कमेटी के अन्य सदस्य।

