किसान संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक उदल आर्य के आवास पर आयोजित की गई, जो दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक चली। बैठक में किसान नेता सुखबीर खलीफा, मजदूर नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा एवं रामस्वरात की कथित गैर-कानूनी नजरबंदी के विरोध में गहन चर्चा की गई।
बैठक में किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरन प्रधान, किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा, किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नगर, किसान परिषद के नेता उदल आर्य, प्रेमपाल चौहान, सचिन अवाना एवं कुंवरपाल प्रधान सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
किसान नेता सुखबीर खलीफा ने बताया कि किसान परिषद का मजदूरों की हड़ताल से संबंधित कोई कार्यक्रम नहीं था, इसके बावजूद पुलिस द्वारा उन्हें उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया, जो पूर्णतः गैर-कानूनी एवं असंवैधानिक है।
इस दौरान उदल आर्य ने किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों पर प्रशासन एवं प्राधिकरण की वादाखिलाफी को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि: किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं की 6 जनवरी 2025 को माननीय मुख्यमंत्री से वार्ता हुई थी जिसमें उन्होंने किसानों के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया था। परंतु
नए कानून को लागू करना,
10% आबादी प्लाट
नोएडा में आबादी छोड़ने की सीमा को 450 वर्गमीटर से बढ़ाकर 1000 वर्गमीटर करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे आज भी लंबित हैं।
उन्होंने बताया कि 23 नवंबर को कमिश्नर के साथ हुई वार्ता में यह तय हुआ था कि 30 नवंबर तक या माननीय मुख्यमंत्री के गौतम बुद्ध नगर आगमन पर किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक कराई जाएगी।
लेकिन 6 महीने बीत जाने और कई बार मुख्यमंत्री के जिले में आने के बावजूद किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं की मुलाकात नहीं कराई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन एवं प्राधिकरण के अधिकारी जानबूझकर किसानों के मुद्दों का समाधान नहीं चाहते और वास्तविक स्थिति माननीय मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचने देना चाहते।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि नजरबंदी की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि:
13 अप्रैल को प्रातः 11:00 बजे सूरजपुर कलेक्ट्रेट पर किसान एवं मजदूर नेताओं की नजरबंदी के विरोध में जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जाएगा तथा पुलिस आयुक्त को विरोध पत्र सौंपा जाएगा।
साथ ही माननीय मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने के संबंध में भी जिलाधिकारी को एक अलग ज्ञापन दिया जाएगा।
बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि आगामी कार्यक्रमों में किसानों के मुद्दों पर माननीय मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं कराई जाती है, एवं गैर कानूनी तौर पर किसान नेताओं में मजदूर नेताओं को नजर बंद किया जाता है तो किसान संघर्ष मोर्चा आगे की रणनीति तय कर एक व्यापक आंदोलन शुरू करेगा।

