दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक जून तक अंतरिम जमानत पर तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पीएम मोदी का खतरनाक मिशन बताया है। केजरीवाल ने पीएम पर आरोप लगाया है। वह आम आदमी पार्टी को खत्म करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। इसे केजरीवाल का कूटनीतिक प्रयास कहें या जमीनी हकीकत कि उन्होंने यहां तक बोल दिया कि मोदी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी राजनीति खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इनकी सरकार बनती है प्रधानमंत्री दो महीने के अंदर योगी आदित्यनाथ को उनके पद से हटा देंगे। केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहते हैं। केजरीवाल का कहना था कि आम आदमी पार्टी एक विचारधारा है, जो खत्म नहीं हो सकती है। इसे जितना खत्म करने का प्रयास किया जाएगा यह उतनी ही मजबूत होगी। अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम क्यों लिया। यह अपने आप में प्रश्न है। केजरीवाल योगी आदित्यनाथ की इतनी क्यों चिंता कर रहे हैं ?
दरअसल अरविंद केजरीवाल ने योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक से तो उन्होंने भाजपा में दो फाड़ करने का प्रयास किया है वहीं दूसरी ओर राजपूतों की सहानुभूति बटोरने का भी प्रयास किया है। यह जगजाहिर है कि योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता आज की तारीख में भाजपा और जनता दोनों में प्रधानमंत्री मोदी से ज्यादा ही है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल ने योगी समर्थकों के मन में मोदी के प्रति नाराजगी व्यक्त किया है। वैसे भाजपा में भी यह बात उभरकर सामने आती रही है कि पार्टी में दो लॉबी काम कर ही है। एक लॉबी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की है और दूसरी लॉबी नितिन गडकरी, योगी आदित्यनाथ की है, जिसको आरएसएस का संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयास है कि उनके बाद देश के प्रधानमंत्री अमित शाह बनें। आरएसएस नितिन गडकरी या फिर योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी का विवाद समय समय पर उभर कर सामने आता रहा है। ऐसी खबरें मार्केट में तैरती रही हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ के सामने केशव प्रसाद मौर्य को खड़ा किया जा रहा था तो गुजरात कैडर के आईएएस अरविंद शर्मा को भी योगी आदित्यनाथ के कामकाज पर निगरानी रखने के लिए लाया गया था।
देखने की बात यह है कि गुजरात में राजकोट के बीजेपी प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री परषोत्तम रुपाला के राजपूत समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद राजपूतों की मांग के बावजूद रुपाला पर कोई कार्रवाई न करना कहीं न कहीं राजपूत नेताओं को नीचा दिखाने का प्रयास माना गया। उत्तर प्रदेश में टिकटों का बंटवारा योगी की सहमति के बिना होना माना गया। यही वजह रही कि पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का विरोध राजपूत समाज कर रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर ननौता, नोएडा के सदरपुर गांव, गाजियाबाद के हापुड़, बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव में राजपूतों की पंचायतें हुईं और भाजपा को हराने का संकल्प लिया गया। इस आंदोलन में किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि उनका योगी आदित्यनाथ को समर्थन है पर वे मोदी के खिलाफ हैं। पहले, दूसरे और तीसरे चरण के चुनाव में राजपूतों की नाराजगी देखी गई है। राजपूतों की नाराजगी का मुद्दा न केवल मीडिया बल्कि चुनावी मंचों पर भी देखने को मिल रही है। बसपा मुखिया मायावती ने गाजियाबाद के प्रत्याशी पुंडीर के पक्ष में चुनावी सभा करते हुए कह चुकी हैं कि भाजपा अपने परंपरागत वोट बैंक राजपूतों की उपेक्षा कर रही है। अब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने राजपूत कार्ड चला है। केजरीवाल का प्रयास है कि राजपूत समाज बीजेपी का विरोध तो करे ही साथ ही आम आदमी पार्टी को समर्थन भी करे।
अरविंद केजरीवाल न केवल दिल्ली बल्कि पंजाब और हरियाणा में भी आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाएंगे बल्कि पूरे देश में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों का भी प्रचार करेंगे। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को तानाशाह बताते हुए कह दिया है कि वह इस तानाशाह के खिलाफ पूरे देश में निकलेंगे। दरअसल दिल्ली में २५ मई को मतदान है। हरियाणा में भी 25 मई को ही है। हां पंजाब में एक जून को है। अरविंद केजरीवाल दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के साथ ही पूरे देश में इंडिया गठबंधन के लिए वोट मांगेंगे।







