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केजरीवाल अब वह सब कर रहे हैं जिसके वह विरोधी थे

चरण सिंह 

अन्ना आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल वह हर काम कर रहे हैं जिसका वह विरोध करते थे। उन सभी नेताओं के साथ गलबहिया कर रहे हैं जिनको भ्रष्टाचारी बोलते थे। पार्टी बनाकर दिल्ली की सत्ता हासिल करने वाले अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ मेट्रो से जाकर ली। अरविंद केजरीवाल राजनीति में  गाड़ी-बंगले के विरोध थे। अब उन्हें देश की सबसे महंगी गाड़ी चाहिए। करोड़ों का बंगला चाहिए। केजरीवाल राजनीति में वंशवाद के विरोधी थे अब वह अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाने की फिराक में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक जून तक अंतरिम जमानत क्या दे दी। कह रहे हैं कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो वह जेल नहीं जाएंगे। मतलब कोर्ट की भी उनकी नजरों में कोई अहमियत नहीं है।
केजरीवाल महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं। दिल्ली की पुलिस इसलिए मांग रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि पुलिस केंद्र सरकार के अधीन होने से दिल्ली की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। वह बात दूसरी है कि उनकी ही सांसद स्वाति मालीवाल ने उनके ही घर पर उनके ही पीए पर अपने साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। उनके ही सांसद संजय सिंह ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर स्वाति मालीवाल के साथ गलत होने की बात केजरीवाल के अपने पीए पर एक्शन लेने की बात की। अब केजरीवाल अपने ही पीए को बचाने में लगे हैं। अब केजरीवाल एंड टीम को यह सब भाजपा का षड्यंत्र नजर आ रहा है। अब उनको अपनी ही सांसद में कमी नजर आ रही है। घर परिवार का ढिंढोरा पीटने वाले केजरीवाल ने कभी प्रयास नहीं किया कि स्वाति मालीवाल और उनके पूर्व पति नवीन जयहिंद के बीच समझौता हो जाए।
देश को स्वच्छ राजनीति देने का दंभ भरने वाले अरविंद केजरीवाल के उप मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री रहे सत्येंद्र जैन जेल में बंद हैं। उनके सांसद संजय सिंह जमानत पर जेल से छुटे हैं। अरविंद केजरीवाल खुद अंतरिम जमानत पर हैं। उनको दो जून को सरेंडर करना है पर उनसे बड़ा ईमानदार दुनिया में नहीं है। आम आदमी पार्टी की बात करने वाले केजरीवाल की पार्टी में अब आम आदमी के लिए कोई जगह नहीं है। देश और समाज की चिंता होने का दंभ करने वाले केजरीवाल को जब राज्यसभा में भेजने के लिए दो दिग्गजों कुमार विश्वास और आशुतोष को भेजने का मौका मिला तो उन्होंने अपने दो स्वजातीय बंधुओं को राज्यसभा भेज दिया। वह बात दूसरी है कि इन दोनों स्वजातीय बंधुओं को किसी ने राज्यसभा में किसी मुद्दे को उठाते नहीं देखा होगा। अरविंद केजरीवाल ने पार्टी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत भूषण को बाहर का रास्ता दिखा दिया। पार्टी का संविधान लिखने वाले योगेंद्र यादव को अपमानित कर पार्टी से निकाल दिया। अरविंद केजरीवाल के संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले कुमार विश्वास को केजरीवाल ने न केवल अपमानित किया बल्कि पार्टी छोड़ने को मजबूर किया। अब उनके परिवर्तन एनजीओ से लेकर अब तक उनके साथ रहने वाली स्वाति मालीवाल ने जब उनके पीए पर मारपीट करने का आरोप लगाया तो केजरीवाल की नजरों में वह भाजपा के साथ मिली हुई हो गईं।
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