सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों द्वारा कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों में QR कोड लगाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की है। यह आदेश दुकान मालिकों की पहचान और अन्य विवरण प्रदर्शित करने के लिए है, जिसे याचिकाकर्ताओं (प्रोफेसर अपूर्वानंद झा, आकार पटेल, महुआ मोइत्रा, और NGO एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स) ने निजता के अधिकार का उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के 2024 के अंतरिम आदेश के खिलाफ बताया है। कोर्ट ने पिछले साल इसी तरह के आदेशों पर रोक लगाई थी, जिसमें दुकानदारों को नाम और कर्मचारियों का विवरण प्रदर्शित करने से मना किया गया था।
15 जुलाई 2025 को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दोनों राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर 22 जुलाई तक जवाब मांगा था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि QR कोड से मालिकों की धार्मिक और जातिगत पहचान उजागर हो सकती है, जिससे भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है। उत्तराखंड और यूपी सरकारों ने इसे खाद्य सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए जरूरी बताया। हालांकि, कोर्ट ने त्वरित सुनवाई की मांग को स्वीकार करते हुए मामले को 22 जुलाई 2025 के लिए सूचीबद्ध किया।
22 जुलाई 2025 तक, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और QR कोड आदेश लागू है क्योंकि कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। याचिकाकर्ताओं ने इसे संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन और धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रयास करार दिया है।

