क्या मुकेश चंद्राकर की हत्या के लिए जिला प्रशासन भी जिम्मेदार नहीं ?

चरण सिंह 
क्या छत्तीसगढ़ के युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के लिए ठेकेदार के साथ ही जिला प्रशासन भी नहीं है ? क्या डीएम और एसएसपी को इस पत्रकार की रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था ? क्या इस पत्रकार की रिपोर्ट के आधार पर इस ठेकेदार पर कार्रवाई हो जाती तो इस पत्रकार की हत्या का दुस्साहस यह ठेकेदार करता ? मतलब इसको मनमानी करने का मौका मिलता रहा और यह करता रहा। देश में बिना मतलब की बहस को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्या इन मुद्दों को लेकर बहस नहीं होनी चाहिए ?
दरअसल देश में यदि आज की तारीख में किसी मुद्दे को लेकर बहस की जरूरत है तो वह भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचारी कौन ? भ्रष्टाचारियों के खिलाफ खड़े होने वाले लोग, भ्र्ष्टाचारियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को दी जाने वाली सुरक्षा है। इन मुद्दों को लेकर बहस की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि भ्र्ष्टाचारी अधिकतर वे लोग हैं, जिनके जिम्मे भ्र्ष्टाचारियों को खत्म करने की जिम्मेदारी है। मतलब ये लोग बड़ा अपराध कर रहे हैं। भ्र्ष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले लोग तमाम विषम परिस्तिथियों के बावजूद देश समाज के लिए लड़ते हैं।
एक तो ऐसे लोग ईमानदार होते हैं तो स्वभाविक है कि इन लोगों के पास पैसे का अभाव होता है। दूसरे भ्र्ष्टाचारियों मतलब ताकतवर लोगों के खिलाफ लड़ते हैं तो इनकी जिंदगी में तमाम जोखिम होते हैं। क्योंकि पैसों का अभाव होता है तो अपनों की ही सुननी पड़ती है। ऐसे में यदि कोई युवा पत्रकार उन लोगों से लोहा ले रहा था, उनके काले कारनामे उजागर कर रहा था जो देश और समाज दोनों के दुश्मन की तरह काम कर रहे थे। तो समझ लीजिये कि यह पत्रकार कितना बड़ा काम कर रहा था ? क्या ऐसे पत्रकार को सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए थी ? एक दम से तो ठेकेदार ने उसकी हत्या नहीं की होगी ? जब यह पत्रकार जोखिमों से खेल रहा था तो क्या जिला प्रशासन की समझ में नहीं आ रहा था कि इस पत्रकार की जान को खतरा हो सकता है। क्या ऐसे में उसका क्या ख्याल रखा गया ? जी हां छत्तीसगढ़ बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के लिए जिला प्रशासन भी जिम्मेदार है।
अब जब इस पत्रकार की हत्या कर दी गई तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर से  सख्त रुख अपनाने की बात सामने आ रही है। आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात सामने आ रही है। जब यह पत्रकार इस ठेकेदार के हजारों करोड़ के काले का पर्दाफाश कर रहा तो इस ठेकेदार पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया ? अब सरकार के निर्देश पर प्रशासन मुख्य आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाकर कड़ा संदेश देने की बात सामने आ रही है। जब यह स्वतंत्र पत्रकार इस ठेकेदार के काले कारनामे का पर्दाफाश कर सकता है तो फिर प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार क्या कर रहे थे ? मीडिया की क्या जिम्मेदारी थी ? मतलब देश में भ्र्ष्टाचारियों के खिलाफ लड़ने वाले लोग बहुत कम हैं। यदि भ्र्ष्टाचारियों के खिलाफ लड़ने वाला किसी पत्रकार की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है तो यह पूरे समाज के लिए शर्मनाक है।

 

पुलिस संदेह व्यक्त कर रही है कि यह हत्या जिले में सड़क निर्माण कार्य में ‘‘अनियमितताओं’’ की एक हालिया खबर से जुड़ी है, जिसे मुकेश ने कवर किया था और सुरेश चंद्राकर उसी निर्माण कार्य में शामिल बताया जाता है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि इस पत्रकार ने अनियमितता उजागर की तो फिर इस ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? मतलब जिला प्रशासन ने इस ठेकेदार को इस पत्रकार की हत्या करने का मौका दिया। अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस पत्रकार के परिवार को आश्वासन दे रहे हैं कि मुकेश चंद्राकर की नृशंस हत्या में शामिल किसी भी दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
क्या इस पत्रकार की रिपोर्ट को अनदेखा करने में डीएम और एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सीएम मुकेश चंद्राकर के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। इस कठिन समय में उनके साथ खड़ा होने की बात कर रहे हैं। सीएम को इस भ्रष्टाचार और इस पत्रकार की हत्या की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए ? कैसे उन राज में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले पत्रकार की हत्या नहीं की गई है ?
दरअसल बीजापुर शहर में एक स्थानीय ठेकेदार के परिसर में बने सेप्टिक टैंक में 33 वर्षीय मुकेश चंद्राकर का शव बरामद किया गया है। मुकेश एक जनवरी की रात से लापता थे। मुकेश चंद्राकर कई समाचार चैनलों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करते थे और एक यूट्यूब चैनल ‘बस्तर जंक्शन’ भी चलाते थे जिस पर लगभग 1.59 लाख सब्सक्राइबर हैं। ये वही पत्रकार हैं जिन्होंने अप्रैल 2021 में बीजापुर के टेकल गुंडा नक्सली हमले के बाद माओवादियों की कैद से कोबरा कमांडो रामेश्वर सिंह मन्हास को रिहा कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस घटना में 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे।
  • Related Posts

    शिक्षा और सामाजिक न्याय की क्रांतिकारी प्रतीक सावित्रीबाई फुले
    • TN15TN15
    • March 10, 2026

    नीरज कुमार भारतीय समाज के इतिहास में कुछ…

    Continue reading
    डा. राममनोहर लोहिया की 117 वीं जन्मतिथि  मनाने की तैयारी जोरो पर 
    • TN15TN15
    • March 2, 2026

    भारतीय समाजवादी विचार के प्रवर्तक , भारत ,…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    भारत के विभाजन का दलितों पर प्रभाव: एक अम्बेडकरवादी दृष्टिकोण

    • By TN15
    • March 12, 2026
    भारत के विभाजन का दलितों पर प्रभाव: एक अम्बेडकरवादी दृष्टिकोण

    बदलाव में रोड़ा बन रहा विपक्ष का कमजोर होना और मीडिया का सत्ता प्रवक्ता बनना!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    बदलाव में रोड़ा बन रहा विपक्ष का कमजोर होना और मीडिया का सत्ता प्रवक्ता बनना!

    339वीं किसान पंचायत संपन्न, युद्ध नहीं शांति चाहिए

    • By TN15
    • March 12, 2026
    339वीं किसान पंचायत संपन्न,  युद्ध नहीं शांति चाहिए

    अमेरिका ने हाल ही में ईरान पर हमले किए हैं, लेकिन “न्यूक्लियर साइट” पर MOAB (सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम) नहीं गिराया ।

    • By TN15
    • March 12, 2026
    अमेरिका ने हाल ही में ईरान पर हमले किए हैं, लेकिन “न्यूक्लियर साइट” पर MOAB (सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम) नहीं गिराया ।

    ‘भारत मुश्किल में…’, ईरान वॉर पर US एक्सपर्ट ने नई दिल्ली को किया आगाह!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    ‘भारत मुश्किल में…’, ईरान वॉर पर US एक्सपर्ट ने नई दिल्ली को किया आगाह!

    कहानी: “नीलो – सत्ता को चुनौती की कीमत “

    • By TN15
    • March 12, 2026
    कहानी: “नीलो – सत्ता को चुनौती की कीमत “