ईरान की सत्ता पर IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने पूर्ण कब्जा नहीं जमाया है, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स में IRGC और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) के बीच गहरा टकराव और सत्ता संघर्ष की खबरें आ रही हैं। राष्ट्रपति काफी हद तक अलग-थलग और कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।
क्या हो रहा है?
ईरान में अमेरिका-इजरायल के साथ चल रही जंग (मार्च 2026 तक लगभग एक महीना पूरा) के बीच सत्ता के अंदर दरारें साफ दिख रही हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अंतरिम लीडरशिप काउंसिल (राष्ट्रपति पेजेशकियान, चीफ जस्टिस और एक जुरिस्ट) काम कर रही है, लेकिन असली ताकत IRGC के हाथ में केंद्रित होती जा रही है।
ईरान इंटरनेशनल और अन्य मीडिया (जैसे जेरूसलम पोस्ट, i24NEWS) के सूत्रों के अनुसार:
पेजेशकियान ने IRGC की युद्ध बढ़ाने वाली रणनीति की आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जंग जारी रही तो अर्थव्यवस्था कुछ हफ्तों में collapse कर सकती है।
राष्ट्रपति ने executive और managerial powers को सिविलियन सरकार (अपनी एडमिनिस्ट्रेशन) को लौटाने की मांग की, लेकिन IRGC चीफ अहमद वाहिदी ने इसे साफ खारिज कर दिया।
IRGC ने पेजेशकियान पर दबाव डालकर कुछ नियुक्तियां (जैसे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी) करवाई हैं, जो उनकी इच्छा के खिलाफ थीं।
IRGC अब की पॉलिसी डिसीजन, युद्ध संचालन और कई राज्य कार्यों पर de facto नियंत्रण रख रहा है। राष्ट्रपति की शांति या डी-एस्केलेशन की कोशिशों (जैसे पड़ोसी देशों से “माफी” या हमले न करने का बयान) को IRGC ने ओवररूल या कमजोर कर दिया।
पेजेशकियान की स्थिति
वे रिफॉर्मिस्ट माने जाते हैं और युद्ध से बचना या जल्द समाप्ति चाहते हैं, लेकिन IRGC के हार्डलाइनर कमांडर्स (वाहिदी सहित) उन्हें साइडलाइन कर रहे हैं।
कई रिपोर्ट्स में उन्हें “political deadlock” में फंसा बताया गया है। IRGC उनकी मंत्रियों की नियुक्तियों को भी ब्लॉक कर रहा है।
यह स्थिति ईरान की पारंपरिक व्यवस्था को दर्शाती है, जहां राष्ट्रपति का पद सीमित होता है और असली ताकत सुप्रीम लीडर + IRGC के पास रहती है। खामेनेई की मौत के बाद यह पावर वैक्यूम और गहरा गया है।
संदर्भ और सावधानी
ये खबरें मुख्य रूप से ईरान इंटरनेशनल (विरोधी मीडिया) और इजरायली/पश्चिमी स्रोतों पर आधारित हैं, इसलिए पूर्ण सत्यापन मुश्किल है क्योंकि ईरान में सूचना नियंत्रित रहती है। फिर भी, कई स्वतंत्र रिपोर्ट्स (Guardian, Al Jazeera आदि) में भी IRGC की बढ़ती भूमिका और राष्ट्रपति की सीमित प्रभावशीलता की पुष्टि होती है।
संक्षेप में: पूर्ण कब्जा नहीं, लेकिन IRGC की मजबूत पकड़ और राष्ट्रपति का अलगाव साफ है। जंग के चलते यह टकराव और बढ़ सकता है, जिससे ईरान की अंदरूनी स्थिरता प्रभावित हो रही है (खाद्य कीमतें 50% बढ़ीं, सैलरी नहीं मिल रही आदि)।

