ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने 16 जून को कहा कि ईरानी संसद NPT से बाहर निकलने के लिए एक विधेयक तैयार कर रही है। हालांकि, ईरान ने बार-बार कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह सामूहिक विनाश के हथियारों का विरोध करता है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी परमाणु हथियार विकसित करने से इनकार किया है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन को अपना अधिकार बताया है।
इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों, जैसे नतांज और फोर्डो, पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसमें कई परमाणु वैज्ञानिक और सैन्य कमांडर मारे गए। खामेनेई ने इन हमलों को “अपराध” करार देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसमें “ट्रू प्रॉमिस 3” ऑपरेशन के तहत इजरायल पर मिसाइल हमले शामिल हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायल खामेनेई को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, हालांकि यह पुष्टि नहीं हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल के हमले ईरान को परमाणु हथियार बनाने की ओर धकेल सकते हैं। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले ईरान को NPT से बाहर निकलने या हथियार निर्माण की ओर ले जा सकते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान कुछ हफ्तों से लेकर एक साल में परमाणु बम बना सकता है, अगर वह ऐसा निर्णय लेता है।
हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावना अभी बाकी है। मगर, ट्रंप प्रशासन की कड़ी नीति और इजरायल के आक्रामक रुख ने मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है। खामेनेई का रुख साफ है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं रोकेगा और इजरायल को “सजा” देगा। यह स्थिति क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है, और इसका हल कूटनीति से निकलना मुश्किल दिख रहा है ।

