ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने व्यापार बढ़ाने, बाजार खोलने, सप्लाई चेन मजबूत करने और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने पर दिया जोर
अमेरिका की टैरिफ की धमकियों और पश्चिम एशिया में उथल-पुथल के बीच नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत ने सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों को एक-दूसरे के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए और व्यापार से जुड़े नियमों को आसान बनाना चाहिए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव की मौजूदगी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में आर्थिक और राजनीतिक कूटनीति के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है।
पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के बारे में क्या कहा?
गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार की बड़ी भूमिका है। उनके मुताबिक, ब्रिक्स देश दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक GDP के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुनिया के कुल व्यापार में भी ब्रिक्स की हिस्सेदारी करीब एक चौथाई है। उन्होंने कहा कि भारत ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी हिस्सेदारी है. इसके अलावा भारत को दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में भी जाना जाता है और दवाओं के क्षेत्र में वह ब्रिक्स देशों के लिए एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बन सकता है।
ब्रिक्स देशों से बाजार खोलने की अपील
वाणिज्य मंत्री ने ब्रिक्स के सदस्य और पार्टनर देशों से अपने बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यापार बढ़ाने के लिए केवल टैरिफ कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि अलग-अलग देशों में लागू नियमों और दूसरी व्यापारिक प्रक्रियाओं को भी सरल बनाना होगा। गोयल ने कहा कि कंसाइनमेंट की मंजूरी में लगने वाला समय कम किया जाना चाहिए, ताकि कारोबारियों के लिए दूसरे देशों में सामान भेजना आसान हो सके। उन्होंने गैर-टैरिफ उपायों से जुड़ी व्यापारिक लागत को भी बड़ी चुनौती बताया. उनका कहना था कि ब्रिक्स देशों के बीच सप्लाई चेन मजबूत और विविध होनी चाहिए। इसके लिए दोनों दिशाओं में व्यापार बढ़ाना जरूरी है. कच्चे माल और जरूरी खनिजों समेत अलग-अलग उत्पादों के लिए बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाना भी महत्वपूर्ण है।
ब्रिक्स के 20 साल पूरे होना अहम पड़ाव- एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन समारोह में कहा कि इस साल ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसलिए यह संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. उन्होंने कहा कि दो दशकों में ब्रिक्स की सदस्यता, एजेंडा और सहयोग के तरीकों में काफी बदलाव आया है। भारत की अध्यक्षता के दौरान लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों से गुजर रही है. भू-राजनीतिक तनाव, महामारी और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ,ऐसे माहौल में देशों के लिए बदलती परिस्थितियों को समझना, उनके अनुसार खुद को तैयार करना और समय पर प्रतिक्रिया देना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है.
डिजिटल तकनीक में दिख रहे नए अवसर
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि चुनौतियों के साथ नई संभावनाएं भी पैदा हो रही हैं। तेजी से बढ़ते डिजिटलाइजेशन और तकनीकी बदलाव से विकास, उत्पादकता और आर्थिक प्रगति के नए रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक माहौल में जोखिम और अवसर दोनों पहले से ज्यादा व्यापक हो गए हैं। ऐसे समय में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग पर भारत का जोर
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत की ओर से दिया गया संदेश साफ रहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच कारोबार बढ़ाने के लिए बाजारों तक आसान पहुंच जरूरी है। नियमों को सरल बनाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और व्यापारिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने से कारोबारी सहयोग को नई गति मिल सकती है।

