नई दिल्ली। ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भू-राजनीतिक उथल-पुथल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों को व्यापार और निवेश संबंधी पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर आर्थिक चुनौतियों से निपटने की दिशा में काम करना चाहिए। एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिक्स (BRICS) अपनी सदस्यता, एजेंडा और सहयोग के तरीकों के मामले में लगातार विकसित हो रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रही है, जिसमें अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता मुख्य बातें बन गई हैं। उन्होंने कहा कि हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में उथल-पुथल मची है। अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता हमारे आस-पास की दुनिया की पहचान बन गई हैं।
एस जयशंकर ने इस मौके पर कहा कि ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा में बढ़ोतरी का मतलब आत्मनिर्भरता मजबूत करना है। हमारा लक्ष्य यह है कि हम वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आर्थिक झटके सहने की अपनी क्षमता बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजार के वास्तविक सिद्धांतों के अनुरूप कारोबारी व्यवहार, भरोसेमंद सहायता, विविध व्यापारिक संबंध, पारदर्शी व्यापार और निवेश और ऐसे कारोबारी माहौल की आवश्यकता है जिसका पूर्वानुमान लगाया जा सके।
ब्रिक्स देशों के बीच आपस में बढ़े सहयोग
एस जयशंकर ने कहा कि इन सभी बातों का मूल उद्देश्य यह है कि हमारे देशों के कारोबारियों के लिए अधिक साझेदार तलाशना, अधिक बाजारों तक पहुंच बनाना, आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ना और एक-दूसरे की क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलना आसान बनाया जाए। निष्पक्ष बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने, व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने, व्यापार और निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने की जरूरत है।
भारत नई दिल्ली में शनिवार और रविवार को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इसमें 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब को शामिल किया गया और इंडोनेशिया 2025 में इसका सदस्य बना।

