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श्यामलाल कॉलेज (सांध्य) में अंबेडकर स्टडी सर्किल का उद्घाटन

आधुनिक भारत के नवनिर्माण की आधारशिला हैं अंबेडकर के विचार – प्रो.नचिकेता सिंह

संविधान के क्रियान्वयन पर ज्यादा जोर होना चाहिए – प्रो. दुर्गेश नंदिनी

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामलाल कॉलेज (सांध्य) में संविधान दिवस के अवसर पर अंबेडकर स्टडी सर्किल का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया. इस आयोजन का उद्देश्य था संविधान दिवस के अवसर पर अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए,समकालीन समय में उनके महत्व और प्रासंगिकता को रेखांकित करना.इस आयोजन के संयोजक डॉ.मनोज कुमार ने इसकी प्रारंभिक
भूमिका रखते हुए अंबेडकर स्टडी सर्किल के स्थापना, उसके प्रारूप और आगामी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी.

कॉलेज के प्राचार्य प्रो.नचिकेता सिंह ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि समकालीन समय में भी अंबेडकर के विचार प्रासंगिक हैं.हमें उसे सही से समझने और देखने की जरूरत है.अम्बेडकर ने शिक्षा,समता और बंधुत्व पर बल दिया.अप्प दीपो भव का भाव किसी भी समाज को आगे बढ़ाने में सहायक होता है.अम्बेडकर के विचार आधुनिक भारत के नवनिर्माण की आधारशिला हैं.
हिंदी विभाग की प्रो.अर्चना उपाध्याय ने संविधान में स्त्रियों के समानाधिकारों को अनेक अनुच्छेदों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कहा कि अम्बेडकर के विचारों ने स्त्रियों की चेतना को जागृत किया।

इस आयोजन की मुख्य अतिथि प्रो. दुर्गेश नंदिनी
(लोक प्रशासन विभाग, इग्नू) ने संविधान दिवस के दिन होने वाले इस आयोजन के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज हमें संविधान को ठीक से समझने के साथ, उसके क्रियान्वयन पर ज्यादा जोर देने की जरूरत है। हम सबका कर्तव्य है कि हम समाज में संविधान के अधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान शुरू करें।ऐसे आयोजनों से हम इसे आगे बढ़ा सकते हैं।अम्बेडकर शिक्षित समाज पर बल देते थे,क्योंकि शिक्षित समाज ही दूसरों को शिक्षित कर सकता है.

राजनीति विज्ञान के प्रो. कुमार प्रशांत ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि संविधान दिवस के परिप्रेक्ष्य में ही इस आयोजन को न देखा जाए,बल्कि हमें सतत अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की जरूरत है.
इस आयोजन में अंबेडकर स्टडी सर्किल के सभी सदस्यों के साथ अनेक विभागों के शिक्षकों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में गरिमामय उपस्थिति रही.

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