कमांडरों की सहमति के बिना सेना पर थोपी गई अग्निपथ योजना
अब रिटायर्ड कर्नल राजेश पायलट खोली मोदी की पोल, कहा- अग्निवीर के नाम पर लागू किया गया राजनीतिक एजेंडा, सेना के अधिकतर कमांडर थे खिलाफ
हर क्षेत्र में विफल साबित हो रही मोदी सरकार, विदेश नीति के नाम पर बस ड्रामा ही होता रहा
चरण सिंह
पीएम मोदी वैसे तो राष्ट्रवाद का राग अलापते रहते हैं पर उनके काम देश को कमजोर करने वाले साबित हो रहे हैं। जहां एक ओर दुनिया के दूसरे देश अपनी सेना को मजबूत करने में लगे हैं वहीं मोदी ने हमारी सेना की बुनियाद ही कमजोर कर दी। अग्निपथ योजना के नाम पर जवान को जो अग्निवीर का नाम दिया है वह सेना को तो कमजोर करने का काम किया है साथ ही युवाओं के भविष्य से भी खिलवाड़ किया गया है। पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल नरवणे की विवादित किताब में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि सेना का प्रस्ताव 75 अग्नि वीरों को स्थाई करने का था जो सरकार ने 25 प्रतिशत कर दिया।
रिटायर्ड कर्नल राजेश पवार ने एक निजी चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा है कि अग्निपथ योजना के खिलाफ अधिकतर कमांडर थे। आज भी जवानों में गुस्सा है। मतलब मोदी ने सेना के कमांडरों और जवानों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए अग्निपथ योजना सेना पर थोपी और सेना को कमजोर किया। जरा सोचिये जब सेना में जवान ही नहीं होंगे तो सेना कहां से मजबूत होगी। क्योंकि सेना में अधिकतर किसान और मजदूर के बेटे ही भर्ती होते हैं तो यह माना जाए कि मोदी की नजरों में किसान और मजदूर का कोई स्थान नहीं है।
जमीनी हकीकत यह है कि मोदी ने मीडिया को हाइजेक कर देश को हर क्षेत्र में कमजोर किया है। इन महाशय से सभी प्रधानमंत्रियों से अधिक विदेशी दौरे किये। अपने पर सबसे अधिक खर्च किया पर विदेश नीति के नाम पर शून्य साबित हुए। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब पाकिस्तान पर हमला किया तो टुच्चे से पाकिस्तान के साथ चीन, टर्की समेत कई देश खड़े हो गए पर हमारे साथ खुलकर कोई देश न आया।
मतलब पीएम मोदी जिस देश में जाते थे वहां भारतीय मूल के लोगों को इकठ्ठा कर भाषण पेल आते थे और गोदी मीडिया मोदी की महिमामंडन करने में लग जाता है। देश की बर्बादी में मोदी सरकार के साथ ही गोदी मीडिया की भी बराबर की भागीदारी मानी जाएगी। गोदी मीडिया ही देश की जमीनी हकीकत देश के सामने नहीं आने दे रहा है।
जिस अमेरिका के दबाव में देश कभी न आया उस अमेरिका के सामने हमारे प्रधानमंत्री घुटने टेके हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान से सीजफायर कराने की बात की। अमेरिका ने 50 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ा दिया। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदना बंद करने को कहा मोदी ने तेल खरीदना बंद कर दिया। अमेरिका ने 18 प्रतिशत टैरिफ कर चेतावनी दे दी कि रूस से तेल ख़रीदा तो टैरिफ 25 प्रतिशत बढ़ा दिया जाएगा। मोदी ने चुप्पी साधी रखी। रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका से अनुमति लेनी पड़ी। यह घुटने टेकना नहीं तो और क्या है ? यह सब तो एप्सटीन
फाइल से मोदी का नाम जोड़ रहा है।
ईरान इजरायल युद्ध में भी मोदी सरकार की विदेश नीति विफल साबित हुई। ईरान पर हमले से एक दिन पहले मोदी इजरायल पहुंच गए। इस हमले में 150 से ऊपर छात्राएं मार दी गईं पर मोदी संवेदनाएं व्यक्त न कर पाएं। अब जब स्टेट ऑफ़ होमुर्ज में भारत के तेल और गैस के टैंकर फंस गए तो मोदी को ईरान से अपने पुराने रिश्ते याद आने लगे। मतबल मोदी ने अपने पुराने दोनों दोस्त रूस और ईरान नाराज कर दिए। अमेरिका का पिट्ठू बार भारत की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फजीहत और कर दी। मोदी देश के सबसे कमजोर प्रधानमंत्री साबित हो रहे हैं पर गोदी मीडिया अब भी अपनी ऐबदा\री से बाज नहीं आ रहा है। देश को कमजोर करने में मोदी सरकार से ज्यादा गोदी मीडिया अधिक जिम्मेदार है। आज की तारीख में देश बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। ऐसे में आज़ादी की लड़ाई की तर्ज पर बड़े आंदोलन की जरूरत देश को है। युवाओं में सच्ची देशभक्ति पैदा करने की जरुरत है।