लोकतंत्र के चौथे पिलर के प्रति सरकारों का रुख उदासीन, पत्रकारों की सुरक्षा, इलाज व पेंशन आदि का मुद्दा रहा चर्चा का केंद्र बिंदु
महेश मिश्रा
नई दिल्ली । दिल्ली मीडिया एसोसिएशन (रजि.) की कार्यकारिणी बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता डॉ बी आर चौहान जी एवम संचालन वेद प्रकाश शर्मा जी (महासचिव) द्वारा किया गया। जिसमे मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई एवम सभी सदस्यों महेश मिश्रा, शैलेन्द्र शास्त्री आदि ने अपने अपने सुझाव रखे। बैठक में लघु समाचार पत्र एवम फ्रीलांसर पत्रकारों ने भी हिस्सा लिया। जहा मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के भविष्य एवम कल्याण की बात हुई तो वोही इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रति सरकार को उदासीनता का भी अवलोकन किया गया। डॉ. बी आर चौहान (अध्यक्ष) ने बताया की दिल्ली में लघु समाचार पत्र पत्रिकाओं एवम श्रमजीवी पत्रकारों की हालत दयनीय है जहा अन्य राज्य इनको पेंशन व विज्ञापन दे बढ़ावा दे रहे है। दिल्ली सरकार, दिल्ली के पत्रकारों के प्रति कोई संवेदना नहीं रखती न ही केंद्र सरकार भी न ही कोई समुचित प्रावधान कर रही है यहां तक पत्रकारों को परिवार सहित मिलने वाली रेल यात्रा में 50% छूट को भी रोक दिया है।
बाकी और भी कई विषयों पर चर्चा हुई लेकिन मुख्य विषयों को क्रियांवित करने के लिए सर्वसम्मति से रेजोल्यूशन पास किया गया एवम पांच सदस्यों (डॉ. चौहान, वेद प्रकाश शर्मा, महेश मिश्रा शैलेंद्र शास्त्री व डॉक्टर प्रदीप कुमार केसरी) की टीम का गठन कर आगे की रणनीति तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया।
बैठक के कुछ अति गहन मुद्दे:-
1) पत्रकारों की पेंशन एवम साथ ही परिवार की भी सुरक्षा, निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कार्ड आदि की मांग।
2) लोकतंत्र के चौथे पिलर माने जाने वाले पत्रकारिता के प्रति सरकारों का रुख उदासीन क्यो है
3) डिजिटल मीडिया (ई चैनल व ई पेपर) व लघु समाचार पत्र पत्रिकाओं को संगठित कर उनको सरकार द्वारा मान्यता एवम सुविधा दिलाना।
4) अगर हमारी मांगों पर सरकार जल्द कोई फैसला नहीं लेती तो हम जल्द ही पूरे देश के मीडिया बंधुओं को एकत्रित कर ठोस कदम उठाए जाएंगे अगर आवश्यकता पड़ी तो देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया जाएगा।
5) जल्दी ही डीएमए द्वारा पत्रकार संगोष्ठी का आयोजन करेगी जिसमे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को डीएमए द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
जैसे जैसे डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा मिल रहा है वैसे वैसे पत्रकारिता के क्षेत्र में भी बहुत बदलाव आया है इसलिए डिजिटलाइजेशन व लघु पत्र पत्रिकाओं द्वारा पत्रकारिता को एक नया आयाम मिल रहा है, हर वर्ग (मुख्यता युवा वर्ग) के काफी प्रभावशाली लोग इससे समाज सेवा की भावना से जुड़ रहे है लेकिन सुविधाओं, प्रशिक्षण व मान्यता न प्राप्त होने से काफी मुश्किलों का सामना कर रहे है जिसके चलते काफी लोगो को इसको बंद करना पडा इसलिए इसके लिए डीएमए रणनीति तैयार करेगा एवम सरकार से इनके संरक्षण की मांग रखेगा।
बैठक में कई वरिष्ठ पत्रकार जिनमे सर्वश्री अजब सिंह, जनार्दन मिश्रा जी के अतरिक्त शिव कुमार अग्रवाल, जयदेव जी, महेश मिश्रा जी, योगेश भट्ट, प्रदीप कुमार केसरी शैलेश शास्त्री, चांदना पॉल, के के सिन्हा, एवम आदि सम्मिलित हुए एवम अपने अपने विचार रखे। सर्वसम्मति से डीएमए की सदस्यता को एक साल बाद फिर से जल्द खोला जाएगा एवम सदस्यता की योग्यता व पात्रता पूर्ण करने वालों को ही डीएमए में सम्मिलित किया जाएगा। आप डीएमए में सम्मिलित होने के लिए अपने प्रोफाइल भेज सकते है।

