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काश फिर से लौट आए वह पत्रकारिता!

हमारे देश में 30 को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। आज के दिन 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से देश के पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ (The Rising Sun) का प्रकाशन शुरू किया था। यह समाचार पत्र एक साप्ताहिक अखबार था,जो हर मंगलवार को प्रकाशित होता था। पत्रकारिता दिवस उन पत्रकारों, संपादकों और मीडिया कर्मियों के संघर्ष, निष्पक्षता और बलिदान का सम्मान करने के लिए समर्पित है, जो सच्चाई को सामने लाने के लिए कार्य करते हैं। जो मीडियाकर्मी सत्ता या फिर किसी प्रभावशाली लोगों के लिए काम करते हैं उनका लिए पत्रकारिता दिवस का कोई महत्व नहीं। जैसे कि आज की तारीख में मीडिया सरकार का प्रवक्ता बना बैठा है। हिन्दू अख़बारों में क्या आज की तारीख में कोई देश और समाज हित में ऐसी स्टोरी या खबर प्रकाशित होती है जिस पर हम गर्व करें। पत्रकारिता के व्यवसायीकरण के चलते मीडियाकर्मियों को का सम्मान लगातार गिरता जा रहा है।

एक दौर था कि मुख्यमंत्री भी संपादक से पूछकर उससे मिलने आता था। आज के संपादक से यदि कोई मुख्यमंत्री मोबाइल से बात भी कर ले तो महीने भर उस मोबाईल फोन की पूजा करेगा। जेब के संपादकों ने पत्रकारिता का स्तर बहुत गिराया है। मालिकों के लिए सत्ता से सांठगांठ और दलाली करने को ही लोग पत्रकारिता मान बैठे हैं।
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