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मैं ज़मीन पर तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं 

सुनो मेरे आदम जब आओ मेरे क़रीब
मेरी एक गुज़ारिश है
किसी फूल को दरख़्त से अलग मत करना मेरी ख़ातिर
मुझे किसी फूलदान की दरकार नहीं
मैं पढ़ सकूं
तुम अपनी दो आंखें लेते आना
मुझे वो पर्याप्त हैं

सुनो मेरे आदम जब जब चिनो दरों दीवार मेरी ख़ातिर
उनमें लगाना खिड़कियां
उनमें लगाना पर्दे बोगनविलिया फूलों के
उस घर की हर सिम्त में रोप देना
गुलमोहर अंबलताश चेरी ब्लॉसम
किसी सुनार से नक्काशी मत करवाना मेरी ख़ातिर
मुझे ज़ेवरात की दरकार नहीं
सुबह सादिक में
तुम रात की रानी के दरख़्त के निचे मिलना मुझसे
वही लम्हा मेरा ज़ेवर है !

मेहजबीं

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