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शुक्रिया कैसे करूं, क्योंकि शब्दहीन हूं मैं

राजकुमार जैन
52 साल से हमसफर साथी प्रोफेसर हरीश खन्ना (भूतपूर्व विधायक दिल्ली विधानसभा दिल्ली) ने कुछ पैबंदों को जोड़कर मेरी तस्वीर के कुछ पहलुओं को कलमबंद कर कई लेखो में पेश किया। उसके बहुत सारे घटनाक्रमों को मैं भी भूल चुका था, सच कहूं इन लेखो की मार्फत साथी हरीश ने बहुत सारे व्यक्तिगत, राजनीतिक घटनाक्रमों को संदर्भ सहित लिखकर रोमांचक बना दिया। उसको पढ़कर 60 सालों के दोस्तों, सहकर्मियों, साथियों, विद्यार्थियों से लेकर आज तक के सैकड़ो मित्रों ने उस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर मुझे जो इज्जत बख्शी है, उससे मेरा भावुक होना लाजमी है। इसलिए उन लेखों तथा उन पर व्यक्त की गई टिप्पणी को दोहराने के लोभ में बेवस हूं।

हालांकि मेरे फेसबुक और व्हाट्सएप के मुख्तलिफ लेखो पर भी वक्त वक्त पर साथियों के द्वारा की गई तारीफ, कमियां भी पढ़ने को मिलती रही है। में सोशल मीडिया में देखता हूं कि लोग अपने किसी साथी, मित्र के लिए उनके ज्ञान त्याग, संघर्षों, खासियत के लिए हजारों की तादात में संदेश, शुक्रिया लिखते हैं, अता करते हैं। पर मेरे लिए यह छोटी संख्या भी बड़ी से बड़ी कायनात के मुकाबले मायने रखती है, क्योंकि ये सब वे लोग हैं जिनके साथ मैंने बरसों बरस संगत तथा सफर तय किया है। उनके प्रेम वचन ही मेरी आज तक की कमाई दौलत है। इससे एक और बड़ा फायदा मुझे मिलेगा कि कभी अपने रास्ते से भटकने की नौबत आ जाए तो साथियों के खुलूस, मोहब्बत अदब की चासनी में सराबोर ये लब्ज मुझे गिरने से बचाएंगे।
सभी का सामूहिक शुक्रिया।

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