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होटल का कमरा नंबर 204 और महिला,’डबलिंग’ की बात पर पहुंची पुलिस

 सीतामढ़ी। बिहार की सीतामढ़ी पुलिस ने नोट डबलिंग करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश कर चार सदस्यों को गिरफ्तार की है। पुलिस की यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। गिरोह के सदस्यों से मोटी रकम और हथियार भी बरामद किया गया है। खास बात यह कि नेपाली नागरिकों को फंसा कर भारतीय क्षेत्र में लाने का काम एक महिला करती थी। पकड़े गए अपराधियों में एक काठमांडू का रहने वाला है।
सदर डीएसपी राम कृष्णा ने बताया कि पिछले कई दिनों से मेजरगंज थाना क्षेत्र में नोटों की डबलिंग करने वाले एक सक्रिय गिरोह की सूचना प्राप्त हो रही थी। तब पुलिस पदाधिकारियों की एक टीम गठित की गई। टीम कई दिनों तक गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखी। इस दौरान पाया गया कि गिरोह नेपाल के भोले भाले नागरिकों को फंसा कर पैसा डबल करने के नाम पर भारतीय क्षेत्र में लाता है। एक-दो बार नोट डबल कर देता है और बाद में मोटी रकम लाने पर उसे लूट लेता है।
डीएसपी ने बताया कि एक-दो नोट डबल हो जाने के बाद नेपाली नागरिकों का गिरोह पर विश्वास हो जाता था। जब वह डबल कराने के लिए मोटी रकम लेकर आते हैं, तो गिरोह के सदस्य फर्जी पुलिस बनकर डरा धमका कर उन्हें लूट लेते थे। नेपाली नागरिकों को फंसा कर लाने वाले सदस्य को लूट की राशि में से 50 फीसदी दी जाती थी। बताया गया है कि चार अक्टूबर की शाम मेजरगंज थाना पुलिस ने गुप्त सूचना पर सोनौल पावर सब स्टेशन के समीप से स्कॉर्पियो सवार दो युवक को गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान थाना क्षेत्र के कुआरी मदन निवासी सुमन कुमार तथा रोहित कुमार के रूप में हुई।
दो व्यक्ति पानी और खेत के रास्ते भागने में सफल रहे। गिरफ्तार सुमन के पैकेट से एक-एक हजार के एक लाख नेपाली रुपये और रोहित के कमर से एक लोडेड देसी पिस्तौल और 8 एमएम का एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। फिर दोनों की निशानदेही पर सीतामढ़ी शहर के जानकी स्थान रीगा रोड स्थित आदित्य पैलेस होटल के कमरा नंबर 204 से नीला नुपाने नामक महिला को गिरफ्तार किया गया, जो काठमांडू की रहने वाली है। वहीं, कमरा नंबर 202 से ठगी के शिकार नेपाल के तमांग थाना क्षेत्र के तमांग जिला निवासी विक्रम थिंक को पकड़ा गया। उससे गिरोह ने एक लाख रुपए ठगी की गई थी।
गैंग में शामिल नेपाली महिला ने बताया कि मोहम्मद सत्तार ने पहले उससे छह लाख की ठगी कर चुका है। ठगी के अपने पैसे वापस लेने के लिए ही वह इस गैंग में शामिल हो गई और डबलिंग के नाम पर ठगी के शिकार हुए विक्रम थिंक को एक लाख के बदले दो लाख रुपये देने का वादा कर अपने साथ लाई थी। उसे रविवार को दो लाख रुपये देना था। बाद में वह मोटी रकम लेकर आता, तब गिरोह के अन्य सदस्य द्वारा नकली पुलिस बन उसका पैसा छीन लिया जाता और उसमें से उसे आधा पैसा मिलता।
मेजरगंज थानाध्यक्ष ललित कुमार सिंह ने बताया कि सत्तार और असलम इससे पूर्व भी कई बार पैसे ठगी सहित अन्य मामले में जेल जा चुके है। गिरोह का सरगना सतार और असलम है, जो नेपाल के नागरिकों को पैसे डबलिंग के नाम पर ठगी का शिकार बनाता रहता है। एक बार जो ठगी का शिकार हो गया, वह इस ग्रुप का मेंबर हो जाता है और वह दूसरे नागरिक को ढूंढ कर लाता है। गिरफ्तार अपराधियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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