राहम इमैनुएल, जो अमेरिका के पूर्व राजदूत (जापान के लिए) और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि ट्रंप ने अपनी ‘अहंकार’ (ego) और पाकिस्तान से मिले ‘पैसे’ (money) के कारण अमेरिका-भारत के 40 साल पुराने रिश्तों को बर्बाद कर दिया। यह बयान मीडाटच नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में आया, जो 16 अक्टूबर 2025 को रिपोर्ट किया गया।
इमैनुएल के मुख्य आरोप:
अहंकार और नोबेल पुरस्कार की चाहत: इमैनुएल ने कहा कि ट्रंप ने भारत के साथ संबंध खराब कर दिए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को पाकिस्तान के साथ ‘सीजफायर’ (जिसे ट्रंप ऑपरेशन सिंदूर के बाद का शांति प्रयास बताते हैं) के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की सिफारिश करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “उन्होंने सब कुछ फेंक दिया क्योंकि मोदी ने नहीं कहा कि राष्ट्रपति को पाकिस्तानियों के साथ सीजफायर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।”
पाकिस्तान से पैसे का दावा: इमैनुएल ने आरोप लगाया कि ट्रंप के बेटे (एरिक और डोनाल्ड जूनियर) और उनके सलाहकार स्टीव विटकॉफ के बेटे को पाकिस्तान से पैसे मिले। यह एक क्रिप्टोकरेंसी फर्म के जरिए हुआ, जिसमें ट्रंप परिवार और विटकॉफ परिवार की 60% हिस्सेदारी है। अप्रैल 2025 में इस फर्म ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पर हस्ताक्षर किए थे।
रणनीतिक नुकसान: इमैनुएल ने इसे ‘मेजर स्ट्रैटेजिक ब्लंडर’ बताया, जिससे चीन को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के लिए चीन के खिलाफ सैन्य, तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्र में बड़ा काउंटरवेट हो सकता था, लेकिन ट्रंप ने इसे ‘पर्सनल गेन’ के लिए दांव पर लगा दिया।
यह बयान तब आया जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लगाए हैं, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त ड्यूटी शामिल है। भारत ने इसे ‘अनुचित और असंगत’ बताया है। भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है (चीन के बाद), और अमेरिका का कहना है कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिल रही है। भारत का रुख है कि उसके आयात ऊर्जा सुरक्षा और किफायती की जरूरतों पर आधारित हैं।
फिलहाल ट्रंप या उनके पक्ष से कोई आधिकारिक खंडन नहीं आया है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर ज्यादातर भारतीय यूजर्स और मीडिया अकाउंट्स ने इसे शेयर किया है, जहां ट्रंप की आलोचना हो रही है। कुछ यूजर्स इसे ‘ट्रंप की लालच’ बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक हमला मान रहे हैं (इमैनुएल डेमोक्रेट हैं)।
अमेरिकी मीडिया में भी यह खबर फैली है, लेकिन ज्यादातर रिपोर्ट्स आरोप को दोहरा रही हैं बिना स्वतंत्र सत्यापन के।
यह दावा अभी तक साबित नहीं हुआ है और राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है, क्योंकि इमैनुएल ट्रंप के आलोचक रहे हैं। अगर और डिटेल्स चाहिए, तो बताएं!






