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“पहले नोटबंदी, फिर देशबंदी — अब वोटबंदी?”

भारत जोड़ो अभियान 9 जुलाई की देशव्यापी आम हड़ताल और बिहार बंद का समर्थन करता है

भारत जोड़ो अभियान 9 जुलाई की देशव्यापी आम हड़ताल का समर्थन करता है। यह सिर्फ़ श्रमिक हितों की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा की हड़ताल है।

इस समय लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ा संकट बिहार से शुरू हुई मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग ने पूरे प्रदेश में पुरानी मतदाता सूची को रद्द कर, नए सिरे से नागरिकों से अपने वोट के अधिकार को साबित करने की ज़िम्मेदारी डाल दी है। यह निर्णय अभूतपूर्व और असंवैधानिक है।

पहली बार ऐसा हो रहा है कि हर मतदाता को फॉर्म भरने के साथ अपने जन्म और नागरिकता के प्रमाण पत्र जमा करने होंगे। जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उन्हें विशेष रूप से कठिन नियमों का सामना करना पड़ रहा है। आमतौर पर उपलब्ध दस्तावेज़ — जैसे आधार, राशन कार्ड, वोटर ID, मनरेगा कार्ड — को मान्यता नहीं दी गई है। इसके स्थान पर ऐसे प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं जो बड़ी संख्या में ग़रीब, ग्रामीण, महिलाओं, दलितों और प्रवासी मज़दूरों के पास नहीं हैं।

जनवरी 2025 में ही पूरी राज्य सूची का पुनरीक्षण हो चुका था। ऐसे में बिना किसी व्यापक चर्चा के इस प्रक्रिया को लागू करना केवल प्रशासनिक गलती नहीं, एक गहरी लोकतांत्रिक चूक है।

भारत जोड़ो अभियान मांग करता है कि यह ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ तुरंत रोका जाए। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की कोई भी प्रक्रिया पारदर्शी, न्यायसंगत और नागरिकों की सुविधा के अनुरूप होनी चाहिए — न कि नागरिकता की जांच की आड़ में करोड़ों लोगों को लोकतंत्र से बाहर कर देने का औज़ार।

यह हड़ताल सिर्फ़ मजदूर वर्ग की नहीं, हर उस नागरिक की है जिसके पास एकमात्र ताक़त उसका वोट है। इस जनांदोलन में देशभर की ट्रेड यूनियनें, किसान संगठन और जन संगठन शामिल हैं, और भारत जोड़ो अभियान उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

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