किसान संगठनों का ऐलान किसानों-मजदूरों के बच्चों के भविष्य को बर्बाद नहीं होने देंगे
आजमगढ़। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने स्कूलों में अव्यवस्था के खिलाफ बेहतर सुविधाओं के लिए आवाज उठा रहे नौनिहालों के आंदोलन का समर्थन किया। किसान संगठनों ने ऐलान किया कि किसानों-मजदूरों के बच्चों के भविष्य को बर्बाद नहीं होने देंगे, स्कूलों की सोशल आडिट की जाएगी।
पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव विरेंद्र यादव और सोशलिस्ट किसान सभा महासचिव राजीव यादव ने कहा कि किसानों-मजदूरों के बच्चों द्वारा स्कूलों में अव्यवस्था के खिलाफ उठाई जा रही आवाज का किसान संगठन समर्थन करते हैं। यह लड़ाई गांव, कस्बे और मोहल्ले तक लड़ी जाएगी। देश में वन नेशन वन इलेक्शन की बात हो रही है, एक देश एक टैक्स की बात हो रही तो आखिर वन नेशन वन एजुकेशन की बात क्यों नहीं हो रही है।
किसान नेताओं ने कहा कि पूरे देश में बेरोजगारी, भर्ती, भ्रष्टाचार, पेपर लीक जैसे मसलों को लेकर नौजवान सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। वहीं स्कूलों में सुविधाओं की मांग को लेकर छात्र लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल ठीक करने की मांग कर रहे हैं। स्कूल जाने के लिए अच्छी सड़कों की मांग कर रहे हैं। मिड डे मील में अच्छे खाने पर बात कर रहे हैं। हुक्मरानों को संभल जाना चाहिए कि इस देश के नौजवान ही नहीं बच्चे भी उनसे आंख से आंख मिलकर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे।
गौरतलब है कि आजादी के 80 साल बीत जाने के बाद भी गांव के प्राइमरी स्कूलों में न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। देश में जहां अमीरों के बच्चों को पढ़ने के लिए एयर कंडीशन क्लासरूम से लेकर लैपटॉप-कंप्यूटर की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं तो वहीं ग्रामीण परिवेश के बच्चे ज्यादातर टाट पट्टी और पंखे के लिए तरस रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है, बच्चों को बैठने के लिए एक अदद डेक्स-बेंच तक की व्यवस्था नहीं है। उमस और गर्मी से निजात दिलाने के लिए कूलर तो छोड़िए क्लासरूम में सीलिंग फैन तक नहीं। बहुत सारे स्कूल ऐसे हैं जहां बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। मिड डे मील के नाम पर हाथ में कटोरा पकड़ा दिया गया। विकसित भारत का दावा करने वाली सरकार बच्चों के लिए ठीक से मिड डे मील और साफ पानी का इंतजाम नहीं कर पाई।

