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किसानों को बेहतर प्रशिक्षण हेतु कलस्टर में आने की जरूरत : गंगेश चौधरी

खरीफ महाअभियान के तहत ई किसान भवन में प्रशिक्षण

रोजगारोन्नमुखी प्रशिक्षण से किसानों में आएगी आर्थिक सबलता

सुभाष चंद्र कुमार
समस्तीपुर पूसा। प्रखंड मुख्यालय स्थित ई किसान भवन के सभागार में खरीफ महाअभियान के तहत प्रखंड स्तरीय कर्मशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता करते हुए बीएओ राजीव कुमार ने बिहार सरकार के द्वारा चलाए जा रहे दर्जनों योजनाओं के बारे में किसानों को विस्तार से बताया।

प्रशिक्षण सत्र में उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि उप परियोजना निदेशक आत्मा गंगेश चौधरी ने कहा कि किसानों को बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कलस्टर में ही आना होगा। कलस्टर से जुड़े किसानों को ही प्रशिक्षण सहित सभी तरह के योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाले सब्सिडी तथा अनुदान देने का निर्णय लिया गया है।

रोजगारोन्नमुखी प्रशिक्षण से किसानों में आर्थिक सबलता आएगी। कस्टम हायरिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त किसानों को ही 10 लाख का ऋण देने का प्रावधान है। जिसमें 8 लाख का सब्सिडी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के कृषि विभाग के नियमानुसार 105 तरह के कृषि यंत्रों पर अनुदान की व्यवस्था दिया गया है।

भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डा विजय कुमार ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन में अन्योनाश्रय संबंध है। जलवायु परिवर्तन की दौर में पशुओं को हिट वेव से बचाने की जरूरत है। कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के वैज्ञानिक डा भारती उपाध्याय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की दौर में कृषि का पैटर्न बिल्कुल ही बदल गया है जिसे किसानों को अपनाने की आवश्यकता आ गई है।

जो किसान जलवायु अनुकूल कृषि को अपनाकर खेत तथा बीजों के प्रभेद का चयन कर खेती कर रहे है। वह किसान बढ़ते हुए तापमान के दौरान भी काम लागत में बेहतर आमदनी प्राप्त कर रहे है। श्री अन्न को बढ़ावा देते हुए इन्होंने सभागार में मौजूद किसानों को बताया कि धान के साथ मरुआ की खेती करने पर स्वास्थवर्धक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है।

मोटे अनाजों की खेती के लिए किसानों को हरसंभव ऊपरी भूमि का चयन करना लाभकारी होता है। मरूआ की खेती सीधी बुआई से करने पर बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना होती है। बिहार सरकार के कृषि विभाग के तहत संचालित जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत सभी तरह के मोटे अनाजों की खेती वैज्ञानिकी तरीके से की जा रही है।

जो फीलवक्त सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के अधीनस्थ पांच पांच गांव को गोद लेकर किसानों के खेत में अनुसंधान की जा रही है। खरीफ मक्का के उत्पादन की दिशा में किसानों को आगे बढ़ने की जरूरत है। स्वीट कार्न एवं बेबी कॉर्न का उत्पादन कर किसान बेहतर लाभ ले सकते है। एटीएम ताजपुर मरूतनंदन शुक्ला ने कहा कि किसानों को उत्पादन बढ़ाने के बदले अपने खेती में लगने वाले लागत दर को ही घटाकर बेहतर आमदनी करने की जरूरत है।

किसानों को खरीफ फसल से ही समय का आकलन कर रबी एवं गरमा फसलों का समय तय कर लेना चाहिए। फिलहाल बदलते परिवेश में समेकित कृषि प्रणाली की मांग बढ़ रही है। संचालन राकेश कुमार सिंह ने किया। मौके पर कृषि समन्वयक मनोज कुमार, महेश कुमार, पुष्कर कुमार एटीएम आदित्य पांडेय सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे।

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