गौरतलब है कि किसान सभा एवं अन्य किसान संगठनों के साथ प्राधिकरण द्वारा विभिन्न मांगों पर लिखित समझौता किया गया था। इसी के परिणामस्वरूप 10 प्रतिशत विकसित भूखंड का प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 133वीं बोर्ड बैठक में पारित कर शासन की स्वीकृति हेतु भेजा गया था। इसके अतिरिक्त वर्ष 2024 में गठित हाई पावर कमेटी ने भी 10 प्रतिशत भूखंड की मांग को उचित माना था, किन्तु यह विषय आज भी शासन स्तर पर लंबित है।
बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि गौतम बुद्ध नगर में नए भूमि अधिग्रहण कानून का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। पिछले 12 वर्षों से किसानों की भूमि के सर्किल रेट में कोई वृद्धि नहीं की गई है। जहां किसानों की जमीनों के बाजार भाव 20,000 से 30,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच चुके हैं, वहीं प्राधिकरण किसानों की भूमि मात्र 4,125 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से अधिग्रहित करने का प्रयास कर रहा है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
किसान सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजब सिंह नेताजी ने कहा कि किसानों की आवाज उठाने वालों पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाता है, जो अत्यंत निंदनीय एवं अलोकतांत्रिक है। गौतम बुद्ध नगर में बिल्डरों और पूंजीपतियों के हितों की रक्षा के लिए किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जिला महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि 17 जुलाई को हजारों किसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में महापंचायत करेंगे तथा आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे।
बैठक में भगत सिंह चेची, बुधपाल यादव, पप्पू भाटी, डॉ. गजेंद्र, यतेंद्र मैनेजर, सुले यादव, भोजराज रावल, लाला नागर, मनोज प्रधान, निरंकार प्रधान, महेश प्रजापति, अजयपाल भाटी, इंद्रजीत भाटी, मुकेश तोगड़, डॉ. जगदीश, लीलू भाटी, उधम सिंह भाटी, एडवोकेट गुरप्रीत, फिरे नागर, विनोद नागर, नरेश नागर, सतीश उपाध्याय, विजय यादव, सुरेश यादव, भोपाल यादव, जोगेंद्र प्रधान, अशोक आर्य, सुरेंद्र पंडित, पवन शर्मा, देशराज राणा, ओमदत्त पंडित, सूबेदार रामभूल सहित अनेक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित रहे।

