केंद्रीय बजट में राजगीर के मुनि सुब्रत स्वामी मंदिर को विकसित करने की घोषणा की गयी है
श्वेतांबर मूर्तिपूजक समाज ने देश के अन्य प्राचीन जैन मंदिर क्षेत्र को विकसित करने की मांग रखी
राम विलास
राजगीर। जैन, बौद्ध और हिन्दुओं के अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक शहर राजगीर को विकसित करने के लिए केंद्रीय बजट में की गयी घोषणा से जैन समाज में अपार खुशी है।
जैन समाज के लोगों ने कहा देर से ही सही केन्द्र सरकार ने राजगीर के धरोहरों को संवारने का निर्माण लिया है। यह स्वागत योग्य निर्णय है। जैन धर्मबलंबियों का कहना है कि राजगीर जैसे प्रतिष्ठित और प्राचीन सिद्ध जैनतीर्थ क्षेत्र को विकसित क्षेत्र बनाने से इसकी वैश्विक पहचान बनेगी। जैनधर्म के 20 वें तीर्थंकर मुनिसुब्रत स्वामी के मंदिर का संपूर्ण विकास होने से पर्यटन के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण हो जायेगा। यह मंदिर पर्यटन की दृष्टि से देश-दुनिया के मानचित्र पर उभर सकेगा। जैन धर्मावलंबियों के अनुसार राजगीर का यह जैन मंदिर करीब 1200 वर्ष प्राचीन है।
जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर मुनिसुब्रत स्वामी की राजगीर जन्मभूमि है। यह उनकी दीक्षा और कल्याणक भूमि भी है। मुनिसुब्रत स्वामी भगवान श्री राम के समकालीन बताये गये हैं। राजगीर जैन संप्रदाय के लिए सिद्ध क्षेत्र के रूप में दुनिया में प्रसिद्ध है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की यह तपस्या स्थल के साथ-साथ कर्मभूमि भी रही है। जैन समाज ने मुनिसुब्रत स्वामी जैन मंदिर के विकास के लिये लाये गये प्रस्ताव पर केंद्र सरकार का आभार जताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री डॉ निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मांग किया है कि राजगीर के पंच पहाड़ियों पर बने जैन मंदिरों के अलावे देश के विभिन्न हिस्सों के जैन मंदिरों का विकसित करने की मांग रखा है। देश में बनाए गए विभिन्न धार्मिक कॉरिडोर की तर्ज पर राजगीर के मुनिसुब्रत स्वामी मंदिर को विकसित किया जाना गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान रखने की आवश्यकता है कि उनकी धार्मिक मान्यताओं और मर्यादाओं पर कोई आंच न आये। उन क्षेत्रों का वैश्विक महत्व केवल पर्यटन न होकर धार्मिक व अध्यात्मिक क्षेत्र में पहले की तरह बरकरार रहनी चाहिए।

