जैसा की आप सब जानते हैं कि बिहार में बेरोजगारी एक व्यापक व भयावह समस्या बन चुकी है परंतु सरकारें तथा राजनीति दलों ने इसे मुद्दा बनाया पर #मौलिक_अधिकार बनाने की जरूरत कभी नही समझी गयी । जितनी नई नौकरियों की आवश्यकता है उसके अनुपात में नई नौकरियों का अनुपात ना के बराबर है उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवा बेरोजगारी व बेकारी की अवस्था में जीने को मजबूर हैं । वहीं सरकारी क्षेत्र में रिक्त पदों को सरकार भरने में असमर्थता जता रही है तो दूसरी तरफ निजी क्षेत्र में नौकरियां लगातार गिरती अर्थव्यवस्था के कारण पैदा नहीं हो रही हैं । जिससे युवाओं का भविष्य कहीं न कहीं अधर में लटका हुआ है अतः हमें अब सुनिश्चित करना चाहिए कि बेरोजगारी, बेकारी की समस्या के समाधान की दिशा में कुछ ठोस व निर्णायक कदम सरकार के द्वारा उठाया जाए ।
1: रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग जाए।
2: शिक्षित युवाओं के लिए मनरेगा की तर्ज पर डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून बनाया जाए।
3: भारत सरकार व राज्यों के अंतर्गत रिक्त पड़े सरकारी पदों पर तत्काल भर्तियाँ शुरू की जाए।
4: सरकारी नौकरियों हेतु लगने वाले आवेदन शुल्क को समाप्त किया जाए।
5: सरकारी विभागों में संविदा, ठेका प्रथा भर्तियों पर तत्काल रोक लगाए जाए तथा समान काम ,समान वेतन की दिशा में नियमित भर्तियाँ हों ।
6: सरकारी कार्यों हेतु निकलनेवाली निविदाओं(टेंडर/ठेकों) में युवाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
7. निजी कंपनियों में भी संविधान में निहित आरक्षण के अनुसार भर्तियाँ हों |
नीरज कुमार

