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राकेश रफीक के परिवारजनों से मिलने बिलारी पहुंचे डॉ. सुनीलम

किसान नेता ने कहा – राकेश रफीक ने वंचित वर्गों की आवाज उठाने के लिए आजीवन संघर्ष किया

 

किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी के सदस्य ,जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक डॉ सुनीलम ने डॉ राकेश रफीक के बिलारी स्थित उनके निवास स्थान पर पहुंचकर उनकी पत्नी डॉ मीनाक्षी सखी, बेटी झरना और दामाद रक्षित से मुलाकात कर राकेश रफीक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पत्रकारों से बात करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि डॉ राकेश रफीक मार्क्स, गांधी और जेपी के विचारों के गंभीर अध्येयता थे । उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों को संबल देने और उनकी आवाज को बुलंद करने के लिए संघर्ष में लगाया। डॉ राकेश रफीक जितना देश और दुनिया के बारे में सोचते थे उतना समय, ऊर्जा और साधन उन्होंने बिलारी की समस्याओं को हल करने में भी लगाया।

डॉ राकेश रफीक ने गांधी विचार से वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन करने के लिए ‘नई तालीम’ नामक किताब लिखी। राष्ट्रवाद की जड़ों और कुछ राजनीतिक दलों द्वारा राष्ट्रवाद के माध्यम से सत्ता हथियाने, भारतीय भाषाओं को समृद्ध करने के डॉ लोहिया के विचार को लेकर एक किताब ‘भारतीय भाषाओं पर लिखी । डॉ सुनीलम ने कहा कि डॉ राकेश रफीक के साथ उनका परिचय 40 वर्ष पहले हुआ था।उन्हें मेधा पाटकर के साथ नर्मदा बचाओ आंदोलन, डॉ बीडी शर्मा के साथ ‘भारत जन आंदोलन, डॉ बनवारी लाल शर्मा के साथ ‘आजादी बचाओ आंदोलन’, अन्ना हजारे के साथ ‘जन लोकपाल बिल आंदोलन ‘ और किसान आंदोलन में साथ काम करने का मौका मिला।
उन्होंने युवा भारत संगठन का निर्माण भी किया था। राकेश रफीक के निधन को उन्होंने नागरिक समाज और व्यवस्था परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध जमात की अपूरणीय क्षति बताते हुए बिलारी (उत्तर प्रदेश) के साथियों से अपील की कि वें राकेश रफीक के अपूर्ण कार्यों को पूर्ण करने के लिए प्रयास जारी रखें। उन्होंने कहा कि जब भी बिलारी के साथी उन्हें आंदोलन में साथ देने के लिए याद करेंगे,तब वे समय देंगे।

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